उत्तराखंड में देवी देवताओं की सत्ता हमेशा से ही रही है। इसलिए यहां के मंदिरों में कई अद्भुत नजारे आपको देखने के लिए मिलेंगे। यहां ऐसे कई कुंड हैं जो अपनी विशेषताओं के लिए देश विदेशों में प्रसिद्घ हैं।
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केदारनाथ धाम में भी ऐसे ही कई कुंड हैं। लेकिन यहां एक ऐसा कुंड है जिसकी खासियत जानकर आप दंग रह जाएंगे। यह कुंड किसी चमत्कार से कम नहीं है।
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केदारनाथ मंदिर से करीब 500 मीटर दूर सरस्वती नदी के तट पर रेतस कुंड स्थित है। ऐसा केदारखंड में लिखा गया है कि यहां ऊं नम: शिवाय का जप करने पर पानी में बुलबुले उठते हैं।
वहीं ऐसा भी कहा जाता है कि इस कुंड के जल को पीने से मनुष्य शिवरूप हो जाता है। इसके उत्तर में स्फटिक लिंग है जिसके पूर्व में सात पद व तीर्थ में बर्फ के बीच में तप्त जल है।
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इसी स्थान पर भीमसेन ने मुक्ताओं से श्री शंकर जी की पूजा की थी। हालांकि वर्ष 2013 में उत्तराखंड में आई तबाही से यह कुंड लुप्त हो गया है लेकिन इसके महत्व के चलते लोग आज भी यहां पूजा करने जाते हैं।
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बता दें कि बीती 03 मई को केदारनाथ धाम के कपाट यात्रियों के लिए खोल दिए गए हैं। यात्रा पड़ावों में भी कई ऐसे अद्भुद स्थान हैं जो तीर्थयात्रियों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
केदारनाथ के मुख्य मंदिर का निर्माण पांडवों ने किया था। मंदिर के ऊपर बीस द्वार की चट्टी है। सबसे ऊपर सुनहरा कलश है। मंदिर के ठीक सामने श्री केदारनाथ जी की स्वयंभू मूर्ति है। उसी में भैंसे के पिछले धड़ की आकृति है।