फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैलाश की दमदार प्रस्तुतियों ने जमाई महफिल, सीट छोड़ युवाओं ने जमकर लगाए ठुमके, तस्वीरें

Sat, 13 Jan 2018 01:19 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, पंतनगर
विज्ञापन
1 of 6
kailash kher
कैलाश खेर की दमदार प्रस्तुति ने भरी सर्दी में भी युवाओं में जोश भर दिया। मैं तो तेरे प्यार में दिवाना हो गया गीत पर युवा जमकर झूमे। तस्वीरें देखिए...
विज्ञापन

2 of 6
kailash kher
आकर्षक इंद्रधनुषीय प्रकाश, शानदार छटा और दमदार साउंड, पीछे बड़ी स्क्रीन। सूफी गायक कैलास खेर की आवाज का जादू और उसे सराहने के लिए युवा जोश। कुछ ऐसा ही नजारा था पं. गोविंद बल्लभ पंत कृषि विवि के दीक्षांत समारोह स्थल का। मौका था स्वामी विवेकानंद जयंती युवा दिवस पर आयोजित कैलास नाइट का।
विज्ञापन

3 of 6
kailash kher
कंपकंपाती ठंड  के बीच शुक्रवार शाम चार बजे से ही श्रोता पंडाल में जमा होने शुरू हो गए थे। निर्धारित समय पांच बजे से ठीक एक घंटा बीस मिनट की देरी से पहुंचे पद्मश्री सूफी गायक कैलास खेर ने आते ही समा बांध दिया। मैं तो तेरे प्यार में दिवाना हो गया ..., गाने से श्रोताओं को ऐसी दिवानगी चढ़ी की जो जहां था, वहीं थिरकने लगा।

4 of 6
kailash kher
इसके बाद उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में तौबा-तौबा रे तेरी सूरत ... मासा अल्लाह रे तेरी सूरत ... से महफिल में चार चांद लगा दिए। बाहुबली फिल्म का गाना कौन है वो कहां से आया ... गाया तो माहौल एक बार फिर बदल गया।  उसके बाद मिल के हम न मिले तुमसे न जाने क्यों ... पिया के रंग, रंगदीनी ओढ़नी ... गाने के तड़के से युवा जहां-तहां थिरकने लगे। 
विज्ञापन

5 of 6
kailash kher
तेरे नाम से जी लूं, तेरे नाम से मर जाऊं गाने ने भी खूब तालियां बटोरी। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ रहा था न श्रोताओं का उत्साह कम हो रहा था, न कैलास का नाम कम हो रहा था। कैलास खुद मंच पर थिरक रहे थे और उनका साथ दे रही थी हजारों की भीड़। श्रोताओं की चाहत पर अपने चिर-परिचित गाने बगड़ बम, बगड़ बम ढोल बजदा और अल्लाह के बंदे हंसदे, तू जो छू ले प्यार से गाने से भी धूम मचाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
kailash kher
कैलास खेर की प्रस्तुति से पहले मध्यप्रदेश के लोकगायक पद्मश्री प्रहलाद टिपणिया ने कबीर के भजनों से महफिल को रूहानियत का एहसास कराया। लोगों ने कबीर के जिन दोहों को, जिन पदों को किताबों में पढ़ा या सुना था, उनको भावगंभीर और सुमधुर प्रखर आवाज में लोकगायकी के रस में सुना तो हर कोई वाह-वाह कर उठा। धोती-कुर्ता रंगीन पगड़ी पहने छह लोकगायकों की टीम का नेतृत्व कर रहे टिपणिया ने धीरे-धीरे रे मना, धीरे सबकुछ होय, कोई उड़ता है गुरु ज्ञानी गगन में भजन से खूब तालियां बटोरीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें