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Joshimath Sinking: चेहरे पर दिख रहे आपदा के आतंक के निशान, ये रिपोर्ट बता रही गेटवे ऑफ हिमालय की हालत

Fri, 06 Jan 2023 05:05 PM IST
रेनू सकलानी दयाशंकर शुक्ल सागर, जोशीमठ
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जोशीमठ में भू-धंसाव - फोटो : अमर उजाला
गेटवे ऑफ हिमालय के नाम से मशहूर जोशीमठ में भू.धंसाव से जमीन में कई मीटर गहरी दरारें पड़ गईं और 700 से ज्यादा घरों की दिवारें दरक गई हैं। इस आपदा के आतंक के निशान यहां हर स्थानीय चेहरे पर दिख रहे हैं। कालोनियां और होटल खाली कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने पिछले तीन दिनों में कोई 70 परिवारों को गेस्टहाउस में शिफ्ट किया।

बृहस्तपतिवार को दस और परिवारों को सुरक्षित स्थलों पर ले जाया गया। सरकार की उपेक्षा से गुस्साए लोगों ने सुबह से कई घंटे चक्का जाम रखा है। सुरक्षा के लिहाज से पर्यटकों के लिए जोशीमठ-औली रोपवे भी बंद कर दिया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय खुद इस मामले में पल पल की जानकरी ले रहा है। राज्य सरकार के विशेषज्ञों की टीम गठित की है जो देर शाम तक जोशीमठ पहुंच जाएगी। ये टीम भू.धंसाव रोकने के लिए दीर्घकालिक और तात्कालिक उपायों के संबंध में अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी।



ये सबकुछ अचानक नहीं हुआ। पर्यटकों का खूबसूरत जोशीमठ एक लंबे अरसे से धंस रहा है। बता दें हेमकुंड साहिब ऑली फूलों की घाटी आदि स्थानों पर जाने के लिए यात्रियों को इसी जांशीमठ से होकर गुजरना पड़ता है। इस भू.धंसाव को लेकर स्थानीय लोगों की जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति पिछले कई सालों से इसे लेकर आंदोलन कर रही है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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जोशीमठ में शिफ्ट किए गए प्रभावित - फोटो : अमर उजाला
अभी तीन दिन पहले शहर के तकरीबन सभी नौ वार्डों में बने कई मकानों में जब अचानक बड़ी दरारें आ गईं। पूरे नगर में भय की लहर दौड़ गई। ये दरारें हर अगले दिन बढ़ती जा रही हैं। उस वक्त ये दहशत और बढ़ गई जब जेपी कंपनी के आवासीय परिसर के मकानों में दरारें आ गई। कॉलोनी के पिछले हिस्से में जमीन से पानी का रिसाव लगातार जारी है।
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जोशीमठ में शिफ्ट किए गए प्रभावित - फोटो : अमर उजाला
खतरा बढ़ता देख जेपी कंपनी ने 50 परिवारों को अपने गेस्ट हाउस में शिफ्ट करा दिया। भू-धंसाव को लेकर जिला प्रशासन की 6 टीमें घर.घर जाकर सर्वे करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने में जुटी हैं। अभी तक जेपी कालोनी के अलावा 34 अन्य परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है।

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जोशीमठ में शिफ्ट किए गए प्रभावित - फोटो : अमर उजाला
सर्वेक्षण कार्य जारी है जिसमें देखा जा रहा है कि किन घरों में दरारें आई हैं। यहां का चर्चित होटल माउंट व्यू जमीन धंसने से तिरछा हो गया। बताते हैं सोमवार रात होटल की दीवारें चटकने की आवाज आने से पीछे रहने वाले परिवार दहशत में आ गए। ये पांच परिवार घर छोड़कर भागे और सारी रात बाहर सर्दी में गुजारी। प्रशासन ने अगले दिन होटल को खाली करा दिया।
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जोशीमठ में भू-धंसाव के कारण परिवारों को किया शिफ्ट - फोटो : अमर उजाला
इसी तरह का जेपी के डाक घर को भी शिफ्ट करना पड़ा। संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक सैनी ने बताया कि प्रभावित परिवारों को नगरपालिका गुरुद्वारा एजीआईसीए आईटीआई तपोवन प्राथमिक विद्यालय जोशीमठ आदि स्थानों पर शरण दी गई है। हालात बिगड़ता देख मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को विशेषज्ञों का एक दल जोशीमठ रवाना किया। यह टीम देर शाम जोशीमठ पहुंच गई।
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जोशीमठ में भू-धंसाव की जांच करती प्रशासन की टीम - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले विशेषज्ञों का यह दल 16 से 20 अगस्त 2022 के बीच जोशीमठ को दौरा कर पहली रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है। यह टीम अगले कुछ दिन जोशीमठ में ही रहकर सर्वेक्षण का कार्य करेगी। इस दौरान दीर्घकालिक और तात्कालिक उपायों के संबंध में टीम सरकार को रिपोर्ट देगी।
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जोशीमठ में भू-धंसाव के बाद खाली कराया होटल - फोटो : अमर उजाला
क्यों धंस रहा जोशीमठ
  • जोशीमठ पहाड़ों के सदियों पुराने मलबे पर बसा है। ये शुरू से ही दरक रहा है। उत्तराखंड जब यूपी का हिस्सा था तब इसकी जांच के लिए पहली बार सत्तर के दशक में गढ़वाल के आयुक्त रहे एमसी मिश्रा की अध्यक्षता में एक 18 सदस्यीय समिति गठित की गई थी। ये मिश्रा समिति नाम से मशहूर है। मिश्र की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई कि जोशीमठ धीरे-धीरे धंस रहा है। 

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जोशीमठ में भू-धंसाव से घर में आई दरार - फोटो : अमर उजाला
  • समिति ने भूस्खलन और भू धसाव वाले क्षेत्रों को ठीक कराकर वहां पौधे लगाने की सलाह दी थी। मिश्र समिति का साफ इशारा किया था कि जोशीमठ में बड़े निर्माण कार्य नहीं होने चाहिए क्योंकि भूस्खलन के मामले में यह क्षेत्र ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र है। इसके बाद पहली बार खतरे की घंटी साल 2021 में चमोली आपदा के वक्त बजी जब तकरीबन 204 लोगों की जान चली गई।

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जोशीमठ में भू-धंसाव के बाद खाली कराए घर - फोटो : अमर उजाला
  • इस हादसे से जोशीमठ के सैकड़ों मकानों में दरार आ गईं। लेकिन सरकार फिर भी नहीं चेती। बड़े प्रोजेक्टों पर काम जारी रहा। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र पंवार भी इसके लिए जोशीमठ में निर्माण कार्य को दोषी मानते हैं।
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जोशीमठ में लोगों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
  • समिति के अध्यक्ष ने इस संवाददाता से कहा कि इसके लिए जल विद्युत परियोजनाए आल वेदर रोडए होटल बड़े भवनों आदि का निर्माण कार्य जिम्मेदार है। हालांकि हाल के अध्ययन शहर में ड्रेनेज सिस्टम न होने को भी इसका बड़ा कारण मानते हैं। उधर प्रशासन का दावा है कि अब नगर में संचालित सभी निमार्ण कार्यों पर रोक लगा दी गई है।
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