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Joshimath Is Sinking: सर्वे की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा बेकरार, एक महीने बाद जानें कैसे हैं हालात

Sun, 05 Feb 2023 11:53 AM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
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जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला
भू-धंसाव के बाद पैदा हुई परिस्थितियों के बीच जोशीमठ को लेकर कई तरह के सवाल हैं। लोग सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं लेकिन सरकार भी फिलहाल स्पष्ट रूप से कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। जब तक आठ वैज्ञानिक संस्थाओं की फाइनल रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक सरकार भी रणनीतिक फैसले लेने में असहज दिखाई दे रही है। अब सारा दारोमदार तकनीकी संस्थाओं की रिपोर्ट पर टिका है।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की ओर से भू-धंसाव के बाद से तमाम निर्माण कार्यों, एनटीपीसी के परियोजना निर्माण कार्यों सहित औली रोपवे के संचालन पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही ड्रेनेज, नालों की लाइनिंग और सीवरेज के कामों को आगे बढ़ाने से फिलहाल रोक दिया गया है। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में जोशीमठ में किसी भी योजना में आगे बढ़ना ठीक नहीं होगा।

सरकार ने इस संबंध में काफी विचार मंथन किया है। एक बार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से सभी तकनीकी संस्थाओं की रिपोर्ट राज्य सरकार को मिल जाए, इसके बाद सभी नीतिगत फैसले लेने में आसानी होगी। जोशीमठ में भू-धंसाव के बाद अलग तरह की परिस्थितियां पैदा हुई हैं, इसलिए हम बहुत सोच समझकर आगे बढ़ रहे हैं, ताकि लोगों को राहत पहुंचाई जा सके।
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सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला
अनसुलझे सवाल
पुनर्वास और राहत पैकेज कब तकः जोशीमठ में पुनर्वास और राहत पैकेज को लेकर जिला प्रशासन के स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आपदा प्रभावितों को शामिल करते हुए एक कमेटी का गठन किया गया है। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना के अनुसार, कमेटी अपनी प्राथमिक रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करा चुकी है। इसमेें कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी है लेकिन कुछ बिंदु विचाराधीन हैं। साथ ही शासन में एसीएस आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है। 27 को इस कमेटी की बैठक होनी थी जो किन्हीं कारणों से टल गई थी। अब यह बैठक सोमवार यानि 30 जनवरी को होगी, जिसमें पुनर्वास एवं राहत पैकेज पर फैसला लिया जा सकता है।
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जोशीमठ से लौटने के बाद सीएम ने ली मीटिंग - फोटो : अमर उजाला
क्या होगा दरार वाले भवनों का
आपदा प्रभावित जोशीमठ में 863 भवनों में दरारें हैं। इनमें से 181 भवनों को पूरी तरह से असुरक्षित घोषित किया गया है। शुरू में कहा गया कि सभी असुरक्षित भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। लेकिन पुनर्वास और राहत पैकेज का एलान नहीं होने पर लोगों के विरोध को देखते हुए सरकार ने इस फैसले से कदम पीछे खींच लिए। इसके बाद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दरार वाले भवनों को आगे चलकर क्या होगा। शासन-प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) की रिपोर्ट पर फैसला लिया जाएगा।

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मकानों में पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला
प्रभावित कब तक रहेंगे राहत शिविरों में
जोशीमठ में 248 परिवारों के 900 सदस्यों को अस्थायी रूप से विस्थापित किया गया है। जबकि 41 प्रभावित परिवार रिश्तेदारों या किराये के घरों में रह रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आपदा प्रभावित आखिर कब तक राहत शिविरों में रहेंगे। इस संबंध में जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने बताया कि प्रभावितों के लिए प्रशासन की ओर से राहत शिविरों में उचित व्यवस्था की गई है। यहां मॉडल प्री फेब्रिकेटेड कॉलोनी भी बनाई जा रही है। यदि प्रभावित चाहेंगे तो उनके लिए प्री फेब्रिकेटेड घर बनाकर दिए जाएंगे, जिसमें वह अपनी मर्जी से शिफ्ट हो सकते हैं। लेकिन यह प्रभावितों की सहमति के आधार पर ही होगा। इसके अलावा जो लोग किराये के भवनों में रह रहे हैं, उन्हें प्रति परिवार पांच हजार रुपये किराया दिया जा रहा है।
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घरों में पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला
जोशीमठ के पुनर्निर्माण पर क्या फैसला लेगी सरकार
30 प्रतिशत प्रभावित जोशीमठ को लेकर सरकार क्या फैसला लेती है, इस सवाल पर सबकी नजरें टिकी हैं। हालांकि यह एक नीतिगत फैसला है, जिस पर सरकार तकनीकी संस्थाओं की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे बढ़ेगी। वहीं, सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा का कहना है कि जोशीमठ का पुनर्निर्माण किया जाएगा। जोशीमठ धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व का नगर है, हम उसे उसके हाल पर नहीं छोड़ सकते। लेकिन पहली प्राथमिकता प्रभावितों के विस्थापन की है। इसके बाद जोशीमठ के पुनर्निर्माण के लिए जो भी बेहतर होगा, वह किया जाएगा।
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जोशीमठ भू-धंसाव - फोटो : अमर उजाला
पानी के रिसाव का रहस्य बरकरार
जोशीमठ में जेपी कंपनी की कॉलोनी के पिछले हिस्से में पहाड़ी से मटमैले पानी का रिसाव अब भी रहस्य बना हुआ है। अब तक करोड़ों लीटर पानी का रिसाव हो चुका है। यह पानी कहां से आ रहा है, रहस्य बरकरार है। लोग इसे एनटीपीसी की टनल से भी जोड़ रहे हैं, लेकिन जब तक तकनीकी संस्थाओं की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक शासन प्रशासन के अधिकारी भी इस संबंध में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
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जोशीमठ भू-धंसाव: लोगों ने छोड़े अपने घर - फोटो : अमर उजाला
एनटीपीसी के विरोध पर सरकार की चुप्पी
जोशीमठ में लोग आपदा के लिए एनटीपीसी को जिम्मेदार बता रहे हैं। कंपनी के विरोध में लगातार धरना-प्रदर्शन हो रहा है। इस मामले में सरकार ने अब तक चुप्पी साधे हुई है। बीते दिनों मुख्य सचिव एसएस संधु ने इतना जरूर कहा था कि एनटीपीसी को क्लीन चिट नहीं दी गई है। इस मामले में भी तकनीकी संस्थाओं की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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होटल ढहाने की कार्रवाई जारी - फोटो : अमर उजाला
मुआवजे को लेकर नहीं बन पर रही एकराय
जोशीमठ में आपदा प्रभावितों के बीच ही मुआवजे को लेकर एक राय नहीं बन पा रही है। कुछ लोग एकमुश्त रकम दिए जाने तो कुछ लोग घर के बदले घर और जमीन के बदले जमीन दिए जाने के पक्ष में हैं। यह जमीन कहां दी जाएगी, यह भी स्पष्ट तौर पर अभी तय नहीं हो पाया है। सरकार की ओर से आपदा प्रभावित 233 परिवारों को अग्रिम राहत के तौर पर अब तक 3.50 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की जा चुकी है। वहीं 105 प्रभावित किरायेदारों को 52.50 लाख रुपये की धनराशि राहत के तौर पर वितरित की गई है। यह धनराशि आगे अंतिम मुआवजा राशि में शामिल की जाएगी।
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जोशीमठ में भू-धंसाव - फोटो : अमर उजाला
जोशीमठ आपदा प्रभावितों के हित में प्रशासनिक स्तर बेहतर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पुनर्वास और राहत पैकेज को लेकर प्रभावितों के साथ हुई बैठकों में कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी है। सोमवार को इस मामले उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक होनी है। संभव है कि इस बैठक में कोई ठोस निर्णय लिया जाए। - हिमांशु खुराना, जिलाधिकारी, चमोली।

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हम तकनीकी संस्थाओं की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। आठ संस्थाओं की रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपी जा चुकी है। एनडीएमए की ओर से रिपोर्ट का विश्लेषण किया जा रहा है। जैसे ही यूएसडीएम को रिपोर्ट प्राप्त होगी, हम उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई करेंगे। फिलहाल जोशीमठ में हालात सामान्य हैं। नई दरारें नहीं आई हैं और पानी का रिसाव भी कम हुआ है। - डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव आपदा प्रबंधन विभाग।
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