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जिस जांबाज ने अकेले 300 चीनी सैनिकों को किया था ढेर, उतने ही दमदार हैं उनकी फिल्म के ये 5 डायलॉग

Sun, 20 Jan 2019 10:23 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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jaswant singh
पौड़ी गढ़वाल के मूल निवासी शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के बलिदान और साहस की वीरगाथा को देख दर्शक भावुक हो उठे। शहीद रावत पर आधारित फिल्म 72 ऑवर्स शुक्रवार को राजधानी के चार सिनेमाघरों में रिलीज हुई। सिनेमाघरों के पहले दिन का पहला शो लगभग हाउस फुल रहा। उनकी फिल्म के ये डायलॉग आपके अंदर भी देशभक्ति का जोश भर देंगे। पढ़िए..
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martyr rifleman jaswant singh rawat - फोटो : अमर उजाला
फिल्म में जब युद्ध होता है तब जसवंत सिंह कहते हैं- ‘हम लोग लौटें न लौटें, ये बक्से लौटें न लौटें, लेकिन हमारी कहानियां लौटती रहेंगी...’ 
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jaswant singh
युद्ध के दौरान गोली लगने पर आपस में बात करते हुए जसवंत सिंह और उनके सहयोगी कहते हैं- 'फौजी पर जंक न लगे इसलिय होती हैं जंग'। 

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martyr, rifleman, jaswant singh rawat
जसवंत सिंह के 'तुम्हारे आने वाले कल के लिए उन्होंने अपना आज कुर्बान कर दिया... डायलॉग ने भी जवानों के बलिदान को उजागर कर दिया। 
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युद्ध में जब चीनी सेना भारी पड़ने लगती है तो आर्मी ऑफिसर जसवंत सिंह को पोस्ट छोड़ने के लिए कहते हैं, तब वे कहते हैं-'मरुंगा-यहीं मरुंगा, लेकिन ये पोस्ट नहीं छोडूंगा'।
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jaswant singh
अपने सैनिकों में जोश भरने के लिए सेना के अधिकारी कहते हैं- 'जंग गोला या बारूद से नहीं जीती जाती, जंग जीती जाती है तुम्हारे जैसे सैनिकों के होने से'। 
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jaswant singh rawat
1962 के भारत-चीन युद्ध के संबंध में जनरल बीएम कौल ने भी अपनी पुस्तक अनटोल्ड स्टोरी में लिखा कि चीन ने एक अक्तूबर की सुबह तेस्ला दर्रे के पश्चिमी हिस्से नूरानांग में चार बार भारतीय चौकी पर आक्रमण किया, जिसे चौथी गढ़वाल राफल्स ने विफल कर दिया। 
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jaswant singh
इस युद्ध में राइफलमैन जसवंत सिंह ने चीनी सैनिकों को अकेले ही 72 घंटे तक रोके रखा था। शत्रु सैनिकों की एक टुकड़ी पर महानायक जसवंत अपनी खुंखरी से लड़ता रहा। इसी दौरान जसवंत ने चीनी सेना की मशीन गन पर कब्जा कर लिया। अंत में वह शत्रुओं की गोली का शिकार बन गया। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से नवाजा गया। 
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