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जन्माष्टमी 2021: लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव पर बन रहा अति दुर्लभ संयोग, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा...

Mon, 30 Aug 2021 10:38 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/हरिद्वार
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जन्माष्टमी के लिए तैयार देवभूमिं - फोटो : अमर उजाला
नंदलाल के जन्मोत्सव को लेकर उत्साहित देवभूमि में भी भव्य तैयारियां की गई हैं। नारायण ज्योति संस्थान के संस्थापक आचार्य विकास जोशी के अनुसार इस साल जन्माष्टमी पर ग्रह नक्षत्रों का अति दुर्लभ विशेष संयोग बन रहा है। ग्रहों के विशेष संयोग के कारण इस साल की जन्माष्टमी बहुत खास मानी जा रही है।

श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में मध्य रात्रि में हुआ था। इस साल 30 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि रोहणी नक्षत्र के साथ वृषभ राशि में चंद्रमा के साथ सोमवार (चंद्रवार) का होना बेहद दुर्लभ संयोग माना जा रहा है।

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हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि के योग भी बन रहा हैं। इस दौरान मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि को लेकर हर बार कृष्ण और शैव मतावलंवियों के बीच में संशय रहता है। तिथि को लेकर मतभेद होने के कारण जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाती है, लेकिन इस बार सभी जगह एक ही दिन जन्माष्टमी मनाई जाएगी।


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जन्माष्टमी पर सजे कान्हा जी - फोटो : अमर उजाला
डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 29 अगस्त की रात 11 बजकर 25 मिनट से शुरू हो जाएगी, जो 30 अगस्त की रात 02 बजे तक रहेगी। ऐसे में पूरे देश में 30 अगस्त को ही जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।
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जन्माष्टमी पर सजा मंदिर - फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र 30 अगस्त की सुबह 06 बजकर 39 मिनट पर रहेगा। ऐसे में जन्माष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त की रात 11 बजकर 59 मिनट से रात 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।

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कृष्ण जन्माष्टमी - फोटो : अमर उजाला
लड्डू गोपाल के पधारने की खुशी में भक्तों ने घरों में भी आयोजन को भव्य रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। नंदलाल को झूला झुलाने के लिए पालने को बेहद सुंदर सजाया गया। 
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कृष्ण जन्माष्टमी - फोटो : अमर उजाला
कई तरह की मिठाइयां भी तैयार की गईं। रविवार को दिनभर घरों में मेवा, पंचामृच, पंजीरी आदि पकवान बनाने में महिलाएं व्यस्त रहीं। जन्माष्टमी को लेकर देहरादून के मंदिर में भी सजावट की गई है। भक्तों द्वारा उपवास रखने के साथ ही कृष्ण प्रेम के भक्ति गीत गाकर और रात में जागरण कर जन्माष्टमी मनाई जाएगी। 
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कृष्ण जन्माष्टमी - फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी पर प्रत्येक साल मध्यरात्रि में कृष्ण के जन्म के बाद उनके बाल रूप की मूर्ति का अभिषेक कर वस्त्र पहनाए जाते हैं। इसके बाद एक पालने में लड्डू गोपाल को रखा जाता है। कई समुदाय जन्माष्टमी पर नृत्य-नाटक भी आयोजित करते हैं, जिन्हें रास लीला या कृष्ण लीला कहा जाता है। हालांकि, कोरोना के चलते इस साल बड़े स्तर पर नृत्य नाटिकाओं का आयोजन नहीं किया जा रहा है।
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