फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव: इनके पास है हर उम्र के लोगों के लिए आसन, साधकों को ऐसे कराया योग, तस्वीरें...

Wed, 03 Mar 2021 11:02 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
विज्ञापन
1 of 5
साधकों को योग करतीं ऊषा माता - फोटो : अमर उजाला
ऋषिकेश के जीएमवीएन गंगा रिजॉर्ट में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में योगिनी ऊषा माता साधकों को बतौर योगाचार्य विभिन्न योगाभ्यास करा रही हैं। उनके अय्यंगर योग, अदोमुखा श्वान आसन, विपरीत्त करनी कुष्ठासन, च्रकासन, सेतुबंद आसन, शीर्षासन आदि विभिन्न प्रकार के आसन साधकों को आकर्षित कर रहे हैं। 

वहीं, अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को भी विभिन्न योगाचार्यों ने साधकों को विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास कराया। साथ ही स्वस्थ जीवन के लिए योग के महत्व से साधकों को अवगत कराया। महोत्सव में ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय की शिवानी ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, योग जीवन जीने का तरीका है। जो इस सृष्टि की हर समस्या को हल कर सकता है।

यह भी पढ़ें...अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव: हठयोग की शिक्षा दे रहे स्वामी जीतानंद, तस्वीरों में देखें अद्भुत योग मुद्रा

योग साधकों को ऑनलाइन (वर्चुअल) माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि पिछला साल कई प्रश्न लेकर आया था। जिससे हम सभी लोगों ने काफी कुछ सीखा, हमारा मन और चित प्रश्नों में उलझा रहता है, हम खुश नहीं रह पाते हैं, जो प्रसन्नचित्त होता है वह प्रसन्न नहीं रह पाता। ऐसे ही मन उलझनों में रहता है कि ऐसा क्यों हुआ, हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है।
विज्ञापन

2 of 5
योग करती साधक - फोटो : अमर उजाला
इस कोरोना काल में लोगों ने योग के महत्व को समझा और उसे जीवन में उतारने की कोशिश की। नाड़ी विज्ञान व योग चिकित्सा के मर्मज्ञ संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मीनारायण जोशी ने सुबह के सत्र में साधकों को योग चिकित्सा के बारे में बताते हुए कहा कि आसन करते हुए यदि चिकित्सीय लाभ लेने हैं तो साधक को आसन का सही तरीका, समय सीमा और आसन के बाद किए जाने वाले पूरक आसन की जानकारी होनी चाहिए।
विज्ञापन

3 of 5
योग करती साधक - फोटो : अमर उजाला
आसन में उपयोग में आने वाली नाड़ी पर सही दबाव यदि डाला जाए तो तभी चिकित्सीय लाभ मिलते हैं। इसी प्रकार कब्ज को दूर करने के लिए ताड़ आसन, त्रियकताड़ आसन और कटिचक्र आसन का अभ्यास बहुत ही लाभकारी होता है। तनाव को दूर करना है तो नियमित रूप से नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। यह मस्तिष्क को शक्ति देता है, स्मृति का विकास कर तनाव को दूर करता है। 

4 of 5
योग करती साधक - फोटो : अमर उजाला
योग साधक आचार्य मित प्रसन्ना ने पॉवर योगा व योग निंद्रा के बारे में साधकों को जानकारी दी। योगी गुलशन कुमार ने कोरोना से बचाव के लिए योग की अनेक विधियों की जानकारी देते हुए बताया कि योग से व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली मजबूत होती है। योगिनी ऊषा माता व आचार्य सिद्धार्थ ने योग साधकों को शरीर विज्ञान के बारे मे बताते हुए कहा कि शरीर अष्ट धातुओं से बना हुआ है, जिसे अष्टचक्र भी कहते हैं, यह शरीर अयोध्या नगरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
योग करती साधक - फोटो : अमर उजाला
इसको हम जितना पवित्र और सात्विक रखेंगे उतना ही शरीर स्वस्थ रहेगा। उन्होंने साधकों को योग व प्राणायाम के अभ्यास कराए। सांय कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्सव ग्रुप, श्रीनगर गढ़वाल की ओर से पांडव नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई। जो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। इस मौके पर जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक आशीष चौहान, महा प्रबंधक(पर्यटन) जितेंद्र कुमार, महाप्रबंधक (प्रशासन) अवधेश कुमार सिंह, महाप्रबंधक (वित्त) अभिषेक आनंद, सहायक प्रधान प्रबंधक (पर्यटन) केएन नौटियाल आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें