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करवाचौथ पर जानिए सबसे पहले किसने रखा था ये व्रत, कैसे हुई थी इसकी शुरुआत

Sun, 08 Oct 2017 11:51 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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करवा चाौथ्‍ा
रविवार को देशभर में करवाचौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखेंगी। तो चलिए जानते हैं कि सबसे पहले किसने इस व्रत को रखा  था, और कैसे इस व्रत की शुरुआत हुई थी।
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करवाचौथ
कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सौभाग्यवती महिलाएं करवाचौथ का व्रत रखती हैं। इस व्रत को सौभाग्य प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है। इसलिए सुहागिने अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखती हैं।
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lord shiva and parvati
मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले माता पार्वती ने यह व्रत शिवजी के लिए रखा था। इसके बाद ही उन्हें अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था। इसलिए इस व्रत में भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है।  वहीं महाभारत में पांडवों की विजय के लिए द्रौपदी द्वारा भी इस व्रत को रखा गया था।

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lord shiva
इस दिन महिलाएं इसलिए ही निर्जला व्रत रखती हैं। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। वहीं यह भी कहा गया है कि एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ और देवताओं की हार होने लगी। इसके बाद भगवान ब्रह्मा कहा कि सभी देवताओं की पत्नियों को अपने पतियों के लिए व्रत रखना चाहिए और उनकी विजय के लिए प्रार्थना करें।
 
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Karva Chauth
ज्यातिषाचार्य पं​डित सुशांतराज के अनुसार, कार्तिक माह में चतुर्थी के दिन सभी देवताओं की पत्नियों ने व्रत रखा। उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं की विजय हुई। इस व्रत को रखने वाली महिला काले और सफेद कपड़े नहीं पहनें। लाल और पीले वस्त्र धारण करें। इस दिन विवाहित महिलाओं को मेहंदी लगाकर पूर्ण शृंगार करना चाहिए।
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करवाचौथ
 इस बार करवा चौथ  पर चतुर्थी तिथि का प्रारंभ आठ अक्तूबर को शाम 4.58 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन नौ अक्तूबर को मध्याह्न 2.16 मिनट पर होगा। इस बार चंद्रोदय 8 अक्तूबर को रात्रि 8.10 मिनट पर हो रहा है। आचार्य संतोष खंडूरी के अनुसार करवा चौथ पर पूजा का मुहूर्त शाम 5.54 मिनट से शाम 7.10 मिनट तक शुभ रहेगा।
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Karva Chauth
इस अवधि में शुभ की चौघड़िया एवं सूर्य की होरा रहेगी। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत का समापन किया जाता है। चतुर्थी के देवता भगवान गणेश हैं। इस व्रत में गणेश जी के अलावा शिव-पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की भी पूजा की जाती है।
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