एशिया-पैसिफिक के पहले ट्रांस बॉर्डर लैंडस्केप कैलाश-मानसरोवर को विश्व धरोहर बनाने की दिशा में चीन और नेपाल से पहले भारत ने कदम आगे बढ़ाए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
भारत ने अपने हिस्से में आने वाले लैंडस्केप का पूरा खाका तैयार कर लिया है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की टीम ने दो दिन लैंडस्केप क्षेत्र में रहकर वहां के लोगों को विश्व धरोहर सहेजने की जिम्मेदारी दी और उसकी अहमियत बताई।
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नेपाल-चीन
कैलाश-मानसरोवर लैंडस्केप का प्रस्तावित विश्व धरोहर परिक्षेत्र भारत, चीन और नेपाल सीमा में आता है। चीन और नेपाल अभी इसकी तैयारी में पीछे है, जबकि केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विशेषज्ञों की टीम ने रविवार को क्षेत्र का दो दिवसीय दौरा पूरा कर लिया है।
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unesco
अब इस संबंध में एक से नौ नवंबर के बीच इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की टीम केंद्रीय मंत्रालय आएगी। 22 नवंबर को यूनेस्को के सलाहकार और विश्व के सभी वर्ल्ड हेरिटेज सेंटरों के विशेषज्ञ इस संबंध में कार्ययोजना तैयार करेंगे।
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kailas mount
कैलाश-मानसरोवर परिक्षेत्र को अनूठी विश्व धरोहर बनाने की तैयारी है। परिक्षेत्र को संरक्षित करने के साथ यहां के लोगों की आजीविका को सुदृढ़ किया जा रहा है।
लोगों को विश्व धरोहर के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा, जिससे वे खुद परिक्षेत्र के विकास और इसके संरक्षण के प्रति सचेत रहें। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम गांवों में जाकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेगी।
कैलाश-मानसरोवर परिक्षेत्र को विश्व धरोहर बनाने की दिशा में भारत ने सबसे पहले काम शुरू कर दिया है। विशेषज्ञ टीम ने क्षेत्र का दौरा कर लिया है। 22 नवंबर को देहरादून के कार्यक्रम में भी विश्व भर के वर्ल्ड हेरिटेज सेंटरों के प्रतिनिधि इस पर चर्चा करेंगे।
- डॉ. वीबी माथुर निदेशक, यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर, देहरादून