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गलवां घाटी झड़प में शहीद जवान के अंतिम संस्कार में रोया पूरा गांव, 31 को होना था रिटायरमेंट, तस्वीरें...

Sun, 16 Aug 2020 10:04 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
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- फोटो : अमर उजाला
भारत-चीन सीमा विवाद के चलते गलवां घाटी में हुई झड़प में घायल कुमाऊं रेजीमेंट के हवलदार बिशन सिंह भी शहीद हो गए हैं। तीन महीने से उनका इलाज चल रहा था लेकिन 15 अगस्त को उन्होंने सेना के चंडीगढ़ स्थित कमांड अस्पताल में अंतिम सांस ली। रविवार को चित्रशिला घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।  
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बिशन सिंह का पार्थिव शरीर लेकर आए सैनिकों ने बताया कि उनका 31 अगस्त को रिटायरमेंट था। रिटायर होने से एक महीने पहले ही कागज तैयार करने का अवकाश दिया जाता है लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के कारण बिशन सिंह को अवकाश नहीं मिल सका। 
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रविवार सुबह शहीद बिशन सिंह के पार्थिव शरीर को जब सेना के वाहन से चित्रशिला घाट ले जाया जाने लगा तो उनके पार्थिव शरीर को बेटे मनोज के साथ बेटी मनीषा ने भी कंधा दिया। इस दौरान वह फूट-फूट कर रोई भी। वाहन में बैठने के बाद जब मनोज ने मां सती देवी और बहन मनीषा को रोते देखा तो हौसला रखने का इशारा भी किया।

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- फोटो : अमर उजाला
पिथौरागढ़ जिले के माड़ीधामी बंगापानी (मुनस्यारी) के मूल निवासी 43 वर्षीय हवलदार बिशन सिंह का परिवार हल्द्वानी में कमलुआगांजा रोड पर विशेष टाउनशिप गली चार में किराए के कमरे में रहता है। छोटे भाई रिटायर्ड सैनिक जगत सिंह ने बताया कि बिशन सिंह 17 कुमाऊं रेजीमेंट में थे। वह गलवां घाटी में तैनात थे। इस दौरान चीन और भारतीय सेना के बीच सीमा विवाद को लेकर झड़प हो गई। 
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- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान बिशन सिंह की आंत में चोट लग गई थी। उन्हें लेह के अस्पताल मे भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर आठ जुलाई को उन्हें कमांड अस्पताल चंडीगढ़ भेज दिया गया जहां 15 अगस्त को उन्होंने दम तोड़ दिया। 
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कुमाऊं रेजीमेंट के सूबेदार बच्ची सिंह और सिपाही नारायण सिंह अपने साथी के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में लेकर देर रात डेढ़ बजे हल्द्वानी पहुंचे। पार्थिव शरीर को छोटे भाई जगत सिंह के विशेष टाउनशिप स्थित आवास में रखा गया। 
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हवलदार की पत्नी सती देवी, बेटा मनोज और बेटी मनीषा बदहवास हो गईं। रानीबाग चित्रशिला घाट पर सैनिकों ने पुष्प चंक्र अर्पित कर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। बेटे मनोज ने पिता को मुखाग्नि दी।
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रविवार सुबह बड़ी संख्या में लोग उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन को पहुंचे। इस दौरान सभी की आंखें नम थीं। पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद उनकी पत्नी सती देवी कभी चिल्लातीं तो कभी अर्द्धबेहोशी में बड़बड़ाने लगतीं। रिश्तेदार और पड़ोसी लगातार ढांढस बंधाते दिखे। वहां पहुंचने वाले लोग भी खुद को भावुक होने से नहीं रोक सके। 
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