कर्मठ मुन्नी भी पौड़ी से लौट आईं। बच्चों के लिए वह पौड़ी गई थीं। पति प्राइवेट जॉब करते हैं। यहां आकर घर बनाया। उसमें खुद लेबर का काम किया है। उनकी सास ने बगीचा लगा रखा है। सास-बहू उसी में काम करती हैं। मधु बताती हैं, गांव का रास्ता बनवाया। रेलिंग भी लगवाई। जो लोग बाहर चले गए हैं, वे हमारे साथ व्हाट्सएप ग्रुप पर जुड़े हैं। वे बोलते हैं, इस विकास का क्या फायदा, जब रास्तों पर चलने वाले ही नहीं हैं। मैं उनसे बस यही कहती हूं, जो गांव में बसे हैं, उनका क्या। कुछ लोग लौट भी रहे हैं।