इसके बाद जवान सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्र में पहुंचे, जहां उन्हें रस्सी के सहारे 10 मीटर हवाई दूरी से सुरक्षित उतरने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने दोनों देशों के जवानों की संयुक्त कंपनी बनाकर पहाड़ी और जंगलों में छिपे दुश्मन के ठिकानों को बमबारी से नष्ट करने की जानकारी दी।