फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीनी टिकटॉक को भारत में कड़ी टक्कर दे रहा स्वदेशी ‘मित्रों’, आरोग्य सेतु एप के बाद दूसरा नंबर

Wed, 27 May 2020 10:17 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
विज्ञापन
1 of 5
मित्रों एप - फोटो : अमर उजाला
आईआईटी रुड़की के पूर्व छात्रों की ओर से बनाया गया स्वदेशी एप ‘मित्रों’ चीन के शॉर्ट वीडियो मेकर एप टिकटॉक को भारत में कड़ी टक्कर दे रहा है। युवाओं के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहे इस एप को गूगल प्ले स्टोर से 50 लाख लोग डाउनलोड कर चुके हैं। आरोग्य सेतु के बाद किसी स्वदेशी एप को डाउनलोड करने की यह दूसरी सबसे ज्यादा संख्या बताई जा रही है।
विज्ञापन

2 of 5
मित्रों एप - फोटो : अमर उजाला
आईआईटी के पूर्व छात्रों का कहना है कि एप लांच करते समय हमें ऐसे ट्रैफिक की उम्मीद नहीं थी। इसे बनाने के पीछे लोगों को सिर्फ भारतीय विकल्प देना था। आईआईटी रुड़की में वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ब्रांच से पासआउट छात्र शिवांक अग्रवाल ने अपने चार साथियों के साथ मित्रों एप बनाया है, जिसे टिकटॉक का क्लोन भी कहा जा रहा है।
विज्ञापन

3 of 5
मित्रों एप - फोटो : अमर उजाला
पेटीएम के पूर्व सीनियर वाइस प्रेजिडेंट दीपक के ट्वीट के बाद इसकी चर्चा हर किसी की जुबान पर है। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के एप डाउनलोड करने से नेटवर्क ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। यूजर्स को लॉग इन करने में दिक्कतें आने लगी हैं। इसे देखते हुए टीम ने इसमें जरूरी सुधार शुरू कर दिए हैं।

4 of 5
tiktok - फोटो : amar ujala
टीम के एक मेंबर ने बताया कि वास्तव में 11 अप्रैल को एप लांच करते समय यह नहीं सोचा था कि इसे इतनी सफलता मिलेगी। टिकटॉक को पीछे छोड़ना जैसी कोई बात नहीं है। हमारा उद्देश्य लोगों को सिर्फ एक भारतीय विकल्प देना था। लोग इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे या नहीं यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमें लोगों से जो आशीर्वाद मिला, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि हमें किसी ने फंड नहीं दिया है, उनका फंड लोगों का प्यार ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
- फोटो : अमर उजाला
इस एप को मित्रों नाम क्यों दिया गया, फ्रेंड्स क्यों नहीं? यह सवाल पूछने पर एप बनाने वाली टीम के मेंबर ने बताया कि मित्रों का अर्थ मित्र ही है। एक तो यह भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय मंच के जरिए सेवा देने के लिए है। दूसरा, फ्रेंड्स नाम दिया होता तो इसके नाम पर कोई सवाल भी नहीं उठाता। हम स्वदेशी नाम देकर भारतीय नामों के खिलाफ पूर्वाग्रहों को भी दूर करना चाहते हैं। आरोग्य सेतु एप हो या कोई भी और स्वदेशी एप। हम चाहते हैं लोग ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी चीजों का इस्तेमाल करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें