होली से आठ दिन पहले होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य कराने को लेकर असमंजस में पड़े लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। होलाष्टक में भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इसे लेकर उत्तराखंड विद्वत सभा ने लोगों की शंका दूर की है।
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आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगाईं
- फोटो : अमर उजाला
सभा के प्रवक्ता आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगाईं के अनुसार, कई राज्यों में होलाष्टक का दोष पड़ता है। दोष पड़ने के कारण होली से आठ दिन पहले तक विवाह, शुभ मुहूर्त, चूड़ा-कर्म व अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन उत्तराखंड में इसका कोई दोष नहीं है।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
कहा जाता है कि होलिका दहन से आठ दिन दाह-कर्म की तैयारी की जाती है। यह मृत्यु का सूचक है। इसी कारण होली से पहले आठ दिनों तक कोई भी शुभ कार्य नहीं होता। होलिका दहन में प्रहलाद के बचने की खुशी में होली का त्योहार मनाते हैं।
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
जानकारी के अभाव में कई लोग शुभ कार्य नहीं कराते, जबकि ऐसा नहीं है। दो मार्च व आठ मार्च को कई विवाह आयोजन भी किए जा रहे हैं। कहा कि शास्त्रों के अनुसार, पंजाब, हिमाचल, राजस्थान समेत कई राज्यों में ही इसका प्रभाव होता है।
इन राज्यों में होलाष्टक दो मार्च से नौ मार्च तक रहेगा। दस मार्च को रंगों के साथ होली मनाई जाएगी। रंगों की होली से एक दिन पहले होलिका दहन की जाती है फिर अगले दिन होली खेली जाती है।