उत्तराखंड अपने धार्मिक महत्व के लिए देश विदेशों तक जाना जाता है। यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का काम यहां के लोग आज भी कर रहे हैं। ऐसे ही एक धरोहर है मछली पकड़ने वाला मेला। तस्वीरें देखकर आप खुद ही इसके रोमांच का मजा लीजिए...
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maun mela
पहाड़ों की रानी मसूरी के नजदीक जौनपुर में उत्तराखंड की ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर मौण मेला आज शुरू हो गया है। हजारों की तादात में ग्रामीण अपने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और औजरों के साथ अगलाड़ नदीं में मछलियों को पकड़ने के उतर गए हैं।
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यह मेला हर साल मनाया जाता है। मेले से पहले यहां अगलाड़ नदी में टिमरू के छाल से निर्मित पाउडर डाला जाता है, जिससे मछलियां कुछ देर के लिए बेहोश हो जाती हैं। इसके बाद उन्हें पकड़ा जाता है।
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हजारों की संख्या में यहां ग्रामीण मछली पकड़ने के अपने पारंपरिक औजारों के साथ उतरते हैं।मानसून की शुरूआत में अगलाड़ नदी में जून के अंतिम सप्ताह में मछली मारने का सामूहिक मौण मेला मनाया जाता है।क्षेत्र के हजारों की संख्या में बच्चे, युवा और बुजुर्ग नदी की धारा के साथ मछलियां पकड़ने उतर जाते हैं।
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खास बात यह है कि इस मेले में पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा जाता है। इस दौरान ग्रामीण मछलियों को अपने कुण्डियाड़ा, फटियाड़ा, जाल तथा हाथों से पकड़ते हैं, जो मछलियां पकड़ में नहीं आ पाती हैं, वह बाद में ताजे पानी में जीवित हो जाती हैं।
बता दें कि इस ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ 1866 में तत्कालीन टिहरी नरेश ने किया था। तब से जौनपुर में निरंतर इस मेले का आयोजन किया जा रहा है। वहीं मेले में जौनपुर जौनसार की संस्कृति की झलक भी देँखने को मिलती है।