देवभूमि के इस मंदिर को हिमाचल में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में न्याय के लिए पूजा जाता है। इसका संबन्ध राष्ट्रपति भवन से भी है। पढ़िए रोचक बातें...
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mahasu temple hanol
यह मंदिर है उत्तराखंड में प्रकृति की गोद में बसा यह मंदिर है 'महासू देवता मंदिर'। यह मंदिर त्यूनी-मोरी रोड पर स्थित है। कहा जाता है कि यहां वह जो भी मनोकामना मांगते हैं, वह जरूर पूरी होती है।
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mahasu temple
उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, बिशैहर और जुब्बल तक महासू देवता की पूजा होती है। इन क्षेत्रों में महासू देवता को न्याय के देवता और मन्दिर को न्यायालय के रूप में माना जाता है। वर्तमान में महासू देवता के भक्त मन्दिर में न्याय की गुहार करते हैं जो उनकी पूरी होती है।
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इस मंदिर की दिलचस्प है कि यहां हर साल दिल्ली से राष्ट्रपति भवन को ओर से नमक भेंट किया जाता है। यह मंदिर मिश्रित शैली की स्थापत्य कला को संजोए हुए है।
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हिमाचल के प्रदेश के लिए चुनाव आदि के लिए भी इस देवता की पूजा करते हैं। जिससे उन्हें जीत मिल सके। कहा जाता है कि इस मंदिर के गर्भ गृह में भक्तों का जाना मना है। केवल मंदिर का पुजारी ही मंदिर में प्रवेश कर सकता है। ऐसा क्यों है यह कोई भी नहीं जानता।
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वहीं यह बात आज भी रहस्य है। मंदिर में हमेशा एक ज्योति जलती रहती है जो दशकों से जल रही है। और मंदिर के गर्भ गृह में पानी की एक धारा निकलती रहती है। लेकिन वह कहां जाती है, कहां से निकलती है इसके बारे में आज तक कोई पता नहीं कर पाया है।
कहा जाता है कि यह मंदिर एक नहीं चार देवताओं बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू (बौठा महासू) और चालदा महासू का सामूहिक नाम है। जो कि भगवान शिव के ही रूप हैं। मान्यता भी है कि महासू ने किसी शर्त पर हनोल का यह मंदिर जीता था। महासू देवता जौनसार बावर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ईष्ट देव हैं। कहा जाता है कि पांडव लाक्षा ग्रह से निकलकर यहां आए थे। इसलिए इसे भगवान की तरह पूजा जाता है।
(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है। यह केवल मान्यताओं और जनश्रुतियों के आधार पर पेश किए गए हैं।)