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अमर उजाला की पहल से हंसी के चेहरे पर ‘हंसी’ लाने को उठे कई हाथ, तीन दिन में मिलेगा आशियाना

Mon, 19 Oct 2020 10:48 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के कुमाऊं विश्वविद्यालय की होनहार और अंग्रेजी व राजनीति विज्ञान से डबल एमए करने वाली अल्मोड़ा की हंसी के धर्मनगरी में भीख मांगने की खबर छपते ही सरकारी तंत्र भी हरकत में आ गया। एक तरफ खुफिया विभाग ने जानकारी जुटाकर शासन को रिपोर्ट भेजी तो दूसरी तरफ कई लोग हंसी प्रहरी और उनके बेटे परीक्षित कुमार के चेहरे पर हंसी लाने के लिए सामने आए। कुछ लोगों ने तत्काल आर्थिक मदद भी की। सोमवार को एसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने उनसे मिलकर तीन दिन के अंदर आवास दिलाने का आश्वासन दिया। 
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- फोटो : अमर उजाला
सोमवार के अंक में अमर उजाला ने अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर क्षेत्र के हवालबाग ब्लॉक के रणखिला गांव की हंसी प्रहरी के हरिद्वार में भीख मांगने की खबर प्रमुुखता से प्रकाशित की थी। खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। सबसे पहले जिले का खुफिया तंत्र हरकत में आया और खबर की सत्यता जानने में जुट गया। खुफिया विभाग के एक दरोगा ने हंसी के बारे में पूरी जानकारी जुटाई। इसी बीच बैरागी कैंप निवासी शालिनी नगरकोटी नेहरू युवा केंद्र पहुंचीं। 
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- फोटो : अमर उजाला
शालिनी कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा कैंपस की छात्रा रह चुकी हैं, वे हंसी से एक क्लास सीनियर थी। शालिनी ने जब उनकी मदद करने की बात कही तो हंसी एकदम नाराज हो गई। उनका कहना था वह अल्मोड़ा की बात ही नहीं करना चाहती हैं। कुछ देर बाद सामान्य हुई तो फिर उन्होंने अपनी कई बातें शालिनी से शेयर की। इसके बाद बिल्केश्वर की रहने वाली और मेडिकल की छात्रा समृद्धि हंसी की मदद करने पहुंची। 

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- फोटो : अमर उजाला
समृद्धि ने पांच हजार की मदद करने की बात कही तो पहले तो हंसी ने लेने से इनकार कर दिया, लेकिन कुछ लोगों के समझाने पर वे राजी हो गई। इसके बाद प्रदेश की ‘बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ’ की ब्रांड अंबेसडर मनु शिवपुरी भी हंसी की सुध लेने पहुंची। मनु शिवपुरी ने कहा कि वह हंसी और उनके बेटे के रहने की व्यवस्था करेगी। जब हंसी को नौकरी करने का प्रस्ताव दिया तो उन्होंने असमर्थता जताई। हालांकि मनु शिवपुरी ने कहा कि वे जिस तरह का काम करना चाहेंगी उसी तरह का काम उपलब्ध कराया जाएगा।
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बातचीत के दौरान हंसी प्रहरी ने बताया कि लाइब्रेरियन की चार साल नौकरी की। नौकरी छोड़ने के बाद जब वे दोबारा अच्छी जॉब की तलाश करने लगी तो नहीं मिली। इसी बीच वैवाहिक जीवन में भी कलह होने लगी। इन दोनों कारणों से वह अवसाद में चली गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके साथ की हरी प्रिया पाठक प्रोफेसर हैं। जबकि उनसे जूनियर बरखा रौतेला भी लेक्चरर हैं। बताया कि बरखा उनसे ही नोट्स लेकर पढ़ाई करती थी। 
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- फोटो : अमर उजाला
हंसी जब अपनी सीनियर शालिनी से बातें करने लगी तो कॉलेज के दिनों में खो गई। दोनों ने वहां के पुस्तकालय में बिताए दिन भी याद किए। इसी दौरान हंसी ने अपने प्रोफेसरों हामिद, नीता जोशी और मंजूना बिष्ट को भी याद किया। हंसी के सीनियर आयकर विभाग देहरादून में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत भुवन पांडे ने भी उनसे बातचीत की और व्यक्तिगत मदद करने को कहा। हंसी ने व्यक्तिगत मदद लेने से इनकार करते हुए कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार को उसे छत उपलब्ध करानी चाहिए। 
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- फोटो : अमर उजाला
राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं हो सकता है कि हंसी जैसी होनहार इस हालत में पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि वह कभी सोच भी नहीं सकते थे कि हंसी जैसी लड़की एक दिन भीख मांगने को मजबूूर होगी। उन्होंने बताया कि वह हंसी को सुरक्षित ठिकाना देने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र लिखेंगे। वह हरिद्वार में रहने वाले अपने परिचितों से भी हंसी की मदद करने के लिए कहेंगे। 
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