हरिद्वार कुंभ
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अमृत योग का लाभ उठाने के लिए साधु संन्यासी अखाड़ा प्रवेश के बाद धूने सजाकर बैठे हैं। होली पर धूनों की राख से छोटे बड़े गोले बनाए जाते हैं। गोलों का आकार भी सातों अखाड़ों में अलग-अलग हैं। किसी अखाड़े में गोल, किसी में तिकोने, किसी में आयताकार तो किसी में लंबोदर गोले बनाए जाते हैं। धूने भगवान महारुद्र को समर्पित हैं। अत: गोले बड़े पवित्र भाव से तैयार होते हैं। गोलों को लेकर नागा संन्यासी अपने मठाधीशों और पीठाधीश्वरों के पास जाते हैं।