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Haridwar Mahakumbh 2021: खूनी संघर्ष से पहले नागाओं ने दौड़ाए थे घोड़े, पढ़ें कुंभ का दिलचस्प किस्सा

Tue, 22 Dec 2020 10:30 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
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हरकी पैड़ी - फोटो : अमर उजाला (File Photo)
कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि हरकी पैड़ी पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु रहते हों और वहां कुंभ की भारी भीड़ के समय भी कोई घोड़े दौड़ा सकता है, लेकिन 1998 के कुंभ में ऐसा हुआ। संन्यासी अखाड़ों के बीच परस्पर खूनी संघर्ष हुआ।

Mahakumbh 2021 : 1938 में भी ग्यारह वर्ष में हुआ था कुंभ, उस साल भगदड़ में सैकड़ों श्रद्धालुओं की गई थी जान
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नागा साधु
दोनों ओर के करीब पचास नागा घायल हुए और अनेक महामंडलेश्वरों व एक शंकराचार्य को अपमान झेलना पड़ा। दरअसल कुंभ के शाही स्नानों में अखाड़ों के बीच स्नान का एक क्रम निर्धारित है। प्रत्येक अखाड़े के हजारों साधुओं को प्रशासन के तय स्नान समय का कड़ाई से पालन करना पड़ता है।
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नागा साधु
एक अखाड़े के जाने के बाद घाट की सफाई होती है और तब पुल के उस पार से अगले अखाड़े को भेजा जाता है। हुआ यूं कि निरंजनी अखाड़े के हजारों नागाओं को स्नान में देरी हो गई। उधर जूना, अग्नि और आह्वान अखाड़ों का समय शुरू हो गया। इस पर तमाम नागा बिफर उठे और भारी फोर्स भी उन्हें रोक पाने में नाकाम हो गई।
 

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हरकी पैड़ी
इसी बीच जूना अखाड़े के घुड़सवार बाबा घोड़ों को पुल से दौड़ाते हुए हरकी पैड़ी आ गए। पीछे-पीछे तीनों अखाड़ों के हजारों बाबा भी पहुंच गए। फिर क्या था। जबरदस्त मारपीट शुरू हुई। बाबाओं ने निरंजनी अखाड़े से लौटते बाबाओं पर रास्ते में भी हमला कर दिया।
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रास्ते में जगद्गुरु शंकराचार्य माधवाश्रम के आश्रम में बाबा घुस गए और तोड़फोड़ की। शंकराचार्य से भी अभद्रता हुई। महामंडलेश्वर संतोषी माता के साथ भी अभद्रता हुई। बाद में नागाओं ने निरंजनी अखाड़े पर पथराव किया। अखाड़े से गोलियां चली तो पुलिस और पीएसी ने भी हवाई फायर किए। दोनों ओर से अनेक साधु और पुलिसकर्मी घायल हुए।
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