एक हजार संत बने नागा संन्यासी
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नागा परंपरा के दौरान वैदिक क्रियाओं के अनुसार दीक्षा देने वालों का सबसे पहले क्षौर्य कर्म होता हैं। इसके पश्चात इनका दशविधि स्नान कराया जाता हैं। इसमें पंचगव्य, गाय का गोबर, गोमूत्र, दही, भस्म, चंदन, हल्दी से दशविधि स्नान संस्कार कराए गए। इसमें दैहिक और कायिक दोनों स्नान का हो जाता है। माना जाता है कि इस स्नान के बाद उनके मनुष्य जीवन के पाप नष्ट हो जाते हैं।