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हरिद्वार कुंभ 2021 : कुंभ से है सिखों के पहले गुरु नानकदेव का गहरा नाता, आप भी पढ़ें

Fri, 02 Apr 2021 04:31 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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Guru Nanak - फोटो : AmarUjalaKavya
कुंभ जैसे मेले बड़े-बड़े संतों को आकर्षित करते आए हैं। प्रथम सिख गुरु नानकदेव महाराज भी कुंभ स्नान करने आए थे। हरकी पैड़ी पर स्नान के बाद उन्होंने दक्षिण दिशा स्थित विष्णुघाट पर ज्ञान गोदड़ी खोली थी। उस स्थान को तभी से नानकवाड़ा के नाम से जाना जाता है।

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नानकवाड़ा संभवत: एक मात्र ऐसा स्थल है, जहां गुरु नानकदेव महाराज की प्रस्तर प्रतिमा लगी हुई है। बाद में गुरु नानक ने निर्मल पंथ स्थापित किया। आगे चलकर सिखों के अंतिम और दसवें गुरु गोविंद सिंह ने निर्मल पंथ को निर्मल अखाड़ा के रूप में धर्म एवं संस्कृत के प्रचार के लिए आकार प्रदान किया। गुरु नानकदेव लाखों श्रद्धालुओं के स्नान करते देख बड़े प्रसन्न हुए।

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ब्रह्मकुंड पर उन्होंने पुरोहितों के समूह को उपदेश दिया। वे अपने पुरोहित के मकान में ही ठहरे। कुंभ मेलों और अन्य स्नानों के अवसर पर धर्मनगरी में जगह-जगह आध्यात्मिक चर्चा, प्रवचन, कथा वार्ता होते हैं। गुरु महाराज ने विष्णुघाट के गंगातट पर भक्तों के सन्मुख ज्ञान का प्रकाश किया। उस समय की भाषा में ऐसे ज्ञानियों के प्रवचनों को ज्ञान गोदड़ी खोलना कहा जाता था।

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पेशवाई में शामिल साधु-संत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
गुरु महाराज ने तीर्थ यात्रियों को प्रतिदिन तीर्थों, पर्वों, धर्मग्रंथों आदि के महत्व की जानकारी दी।
 
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हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उन्होंने आडंबरों और कुप्रथाओं के खंडन की शुरुआत हरिद्वार के इसी धरती पर की। अनेक वर्ष बाद उनके पुत्र श्रीचंद महाराज भी हरिद्वार आए।

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हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
तीजी पातशाही गुरु अमरदास ने कुंभ मेले सहित हरिद्वार की 21 यात्राएं की। तीजी पातशाही ने कनखल में उन्होंने सती प्रथा बंद कराई।
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हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
हरिद्वार के कुंभ मेलों ने गुरु हरकिशनदास को भी आकर्षित किया।
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