हरिद्वार कुंभ
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दस तरह के होते है हठयोग
- 1 दंडी
ये साधु अपने साथ दंड और कमंडल रखते हैं। दंड बांस का एक टुकड़ा होता है, जो गेरुआ कपड़े से ढंका रहता है। ये किसी धातु की वस्तु को नहीं छूते। ये भिक्षा के लिए दिन में एक ही बार जाते हैं।
- 2. ऊर्ध्वबाहु
ये संन्यासी अपने इष्ट (भगवान) को प्रसन्न करने के लिए अपना एक या दोनों हाथ ऊपर उठाकर रखते हैं।
- 3. आकाशमुखी
जो संन्यासी आकाश की ओर देखते रहते हैं, उन्हें आकाशमुखी कहते हैं। ये एक कठोर साधना है, जो कम ही साधु कर पाते हैं।
- 4. थारेश्वरी
ये संन्यासी दिन-रात खड़े रहने की शपथ लेते हैं। वे खड़े-खड़े ही भोजन करते और सोते हैं। ऐसे साधुओं का हठयोगी भी कहा जाता है।
5. नखी
- जो संन्यासी सालों तक खून नहीं काटते, उन्हें नखी कहते हैं। इनके नाखून सामान्य से 20 गुना तक बड़े हो सकते हैं।