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Haridwar Kumbh Mela 2021 : अखाड़ों के साथ और भी कई संगठनों से जुड़ी है भगवा संस्कृति

Tue, 26 Jan 2021 11:54 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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कुंभ 2019 - फोटो : अमर उजाला (file photo)
संतों की परंपरा में अखाड़े और आणियां सर्वोच्च हैं। अखाड़ों से आए निर्देशों का पूरा संत जगत पालन करता है। इसके बावजूद संतों के अनेक संगठन हैं। संगठनों का संत जगत में व्यापक प्रभाव है। अखाड़ों को सर्वोच्च मानते हुए संगठन देश में और कुंभ मेलों पर व्यापक भूमिका अदा करते हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की भांति अखिल भारतीय संत समिति से भी देश के बड़े-बड़े संत जुड़े हैं।
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कुंभ 2019 - फोटो : अमर उजाला (file photo)
वीतराग स्वामी वामदेव महाराज ने संत समिति की स्थापना की थी। संत समिति की शाखाएं भारत के सभी तीर्थों और अनेक नगरों में हैं। कुंभ मेलों पर संत समिति से जुड़े संतों के अनेक शिविर लगते हैं। अखिल भारतीय षड्दर्शन साधु समाज भी देशभर में फैला है। आश्रम बनाकर रहने वाले हजारों संत षड्दर्शन से जुड़े हैं। संगठन में विद्वान संतों की भरमार है। आश्रमों के संतों ने कई तीर्थों पर आश्रमों की समस्याओं के निराकरण के लिए आश्रम परिषद का गठन भी किया है।
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कुंभ 2019 - फोटो : अमर उजाला (file photo)
कुंभ मेलों पर परिषद का धर्म प्रचार पूरे कुंभ क्षेत्र में होता है। संतों का एक और राष्ट्रीय संगठन भारत साधु समाज है। यह संगठन प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी गतिविधियां वर्षभर चलाता है। संतों का सर्वोच्च पर शंकराचार्य पद है। वैधानिक रूप से शंकराचार्य परिषद एक इकाई है। इसमें चारों शंकराचार्य शामिल हैं। तमाम अखाड़े महामंडलेश्वर बनाते हैं।

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पायलट बाबा - फोटो : अमर उजाला (file photo)
विगत कुंभ में महामंडलेश्वरों ने पायलट बाबा की अध्यक्षता में महामंडलेश्वर परिषद बनाई थी, लेकिन इस पर अखाड़ा परिषद ने यह कहते हुए एतराज जताया कि महामंडलेश्वर तो पहले ही अखाड़ों से जुड़े हुए हैं। वे अलग से संगठन खड़ा नहीं कर सकते। बाद में महामंडलेश्वर परिषद भंग करनी पड़ी। इसी प्रकार महिलाओं के परी अखाड़ा को लेकर विवाद चला आ रहा है।
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किन्नर अखाड़ा - फोटो : अमर उजाला (file photo)
अखाड़ा परिषद परी अखाड़े को मान्यता नहीं देती। ऐसा ही विवाद किन्नर अखाड़े को लेकर था, जिसे बाद में जूना अखाड़े की इकाई के रूप में मान्यता दे दी गई। कुंभ मेलों की पेशवाईयों, धर्मध्वजाओं, शाही स्नानों आदि में अखाड़ों के साथ इन सभी भगवा इकाइयों के साधु संत शामिल होते हैं। धर्मसंसद के आयोजन में भी सभी भाग लेते हैं।
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