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कुंभ मेला 2021: पूरी हुई 200 महिला संन्यासियों की नागा दीक्षा, भाजपा नेता और रेलवे अधिकारी भी बने संन्यासी

Thu, 08 Apr 2021 09:34 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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महिला नागा संन्यासी - फोटो : अमर उजाला
हरिद्वार में नागा संन्यासियों के सबसे प्राचीन एवं बड़े अखाड़े श्रीपंच दशनाम जूना में नागा संन्यासियों को दीक्षित करने का पहला चरण बृहस्पतिवार को पूरा हो गया। माईबाडे़ की 200 महिला संन्यासियों को आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने प्रेयस मंत्र दिया।

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नागा संन्यास की दीक्षा लेने वालों में गाजियाबाद की भाजपा महिला नेता और वृंदावन के रेलवे अधिकारी (अप्रा) भी शामिल हैं। जूना अखाड़े की ओर से दो दिन पहले एक हजार पुरुष नागा संन्यासियों को दीक्षा दी गई थी।

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बुधवार से दुखहरण हनुमान मंदिर निकट बिड़ला पुल के पास 200 महिला नागा संन्यासियों के दीक्षा संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। बृहस्पतिवार सुबह ब्राह्ममुहूर्त में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने संन्यासियों को प्रेयस मंत्र देकर संन्यास प्रक्रिया पूरी कराई।

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नागा संन्यास दीक्षा लेने वालों में माई कैलाश गिरि एवं नागा संन्यासी महंत रमेश गिरि प्रमुख रहे। दोनों दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि के शिष्य हैं।
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प्रेयस मंत्री लेने के बाद महिला नागा संन्यासी - फोटो : अमर उजाला
माई कैलाश गिरि स्नातक हैं और सामाजिक कार्यों के साथ राजनीति में भी सक्रिय रही हैं। हरनंदेश्वर महादेव मंदिर, हिंडन, गाजियाबाद निवासी माई कैलाश गिरि का पूर्व नाम सरोज शर्मा था, जो अब बदल गया है। वह भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष के साथ प्रदेश स्तर पर भी कई पदों पर रह चुकी हैं।
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महिला नागा संन्यासी - फोटो : अमर उजाला
श्रीमहंत नारायण गिरि से प्रभावित होकर कैलाश गिरि ने वर्ष 2010 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा की थी। तभी से वह धर्म की ओर आकर्षित हुईं और हरिद्वार महाकुंभ में उन्होंने पूर्ण रूप से संन्यास ग्रहण कर लिया।

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महिला नागा संन्यासी - फोटो : अमर उजाला
श्रीमहंत नारायण गिरि के दूसरे शिष्य महंत रमेश गिरि वृंदावन निवासी हैं और उत्तर रेलवे में सुरक्षा अधिकारी पद से हाल में ही सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि सर्विस के दौरान श्रीमहंत नारायण गिरि से भेंट हुई थी।
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महिला नागा संन्यासी - फोटो : अमर उजाला
तभी से उनका ध्यान अध्यात्म की ओर आकृष्ट हो गया। सेवानिवृत्त होने के बाद अब संन्यास ग्रहण कर लिया और अब वृंदावन में आश्रम बनाकर रह रहे हैं। जूना अखाड़े में संन्यास दीक्षा का दूसरा चरण 25 अप्रैल को होगा। इसके लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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