जी हां, अब जल्द ही सरकार 50 साल पार सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने वाली है। पढ़िए, इसके पीछे की वजह...
उत्तराखंड सरकार में 50 की उम्र पार कर चुके अफसरों और कर्मचारियों पर अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तलवार लटक गई है। प्रदेश सरकार प्रथम श्रेणी से लेकर समूह घ तक के उन सभी कर्मचारियों के कामकाज का आकलन करेगी।
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आकलन के दौरान जो सरकार की कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। स्क्रीनिंग की शुरुआत सरकार ने शासन से की है। सचिवालय में सभी श्रेणियों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियों का गठन कर दिया गया है। प्रमुख सचिव (सचिवालय प्रशासन) आनंद बर्द्धन ने इसका शासनादेश जारी कर दिया है।
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cm trivendra in pauri
राज्य सरकार ने कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए 50 साल की आयु पूरी करने वाले अफसरों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का फैसला लिया है। 6 जुलाई 2017 को मुख्य सचिव एस. रामास्वामी की ओर से अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए सभी विभागों को स्क्रीनिंग कमेटी गठित करने के आदेश जारी किए गए। इन आदेशों का सचिवालय प्रशासन विभाग ने अनुपालन कर दिया।
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cm trivendra singh rawat in pithoragarh
कार्मिकों की सेवाओं और कामकाज का आकलन करने के लिए पदों की श्रेणी के हिसाब से स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई। यह कमेटी कार्मिक के काम करने में रुचि, लोक हित की सेवाओं का आकलन कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की संस्तुति देगी। श्रेणी ‘क’, ‘ख’ के अधिकारियों के लिए बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन होंगे।
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cm trivendra singh rawat
प्रमुख सचिव कार्मिक की ओर से नामित अधिकारी व संबंधित विभाग का काम देख रहे अपर सचिव सदस्य होंगे। इसी तरह श्रेणी ‘ग’ कार्मिकों के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष अपर सचिव सचिवालय प्रशासन को बनाया गया। संयुक्त सचिव कार्मिक व संयुक्त सचिव अधिष्ठान सदस्य होंगे। श्रेणी ‘घ’ के कार्मिकों की कमेटी में प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन अध्यक्ष, उप सचिव व अनुभाग अधिकारी सदस्य नामित किए गए हैं।
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त्रिवेंद्र सिंह रावत
- फोटो : google
सभी विभागों की ओर से हर साल स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में 50 साल आयु वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवाओं व कार्यप्रणाली की आकलन किया जाएगा। यदि अधिकारी व कार्मिक अपने दायित्वों के मुताबिक काम नहीं कर रहा है तो सरकार स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देगी।
सेवाकाल से पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति से बचने के लिए 50 साल की आयु वाले अफसरों और कर्मचारियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार के साथ तेजी लानी होगी। अन्यथा कार्य के प्रति लापरवाही व सुस्ती बरतने पर सरकार अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सरकारी सेवा से मुक्त कर सकती है।