फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे ने बदला इतिहास, सवा सौ साल बाद शताब्दी चलाएंगी बेटियां

Tue, 21 Feb 2017 10:57 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी
विज्ञापन
1 of 7
sunita kumari - फोटो : amar ujala
1882 में कुमाऊं के लिए पहली ट्रेन चली थी, इस दौरान रेलवे ने कई बदलाव देखे हैं। सवा सौ साल बाद कुमाऊं में रेलवे के इतिहास में नई इबरात लिखी गई है।
 
विज्ञापन

2 of 7
शताब्‍दी एक्‍सप्रेस - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
कुमाऊं से चलने वाली वीवीआईपी शताब्दी ऐसी पहली ट्रेन है, जिसके संचालन में बेटियां बतौर लोको पायलट सहयोग कर रही हैं। रेलवे अधिकारी भी इस उपलब्धि से गदगद हैं।
 
विज्ञापन

3 of 7
शताब्दी एक्सप्रेस
बेटियां हर उस क्षेत्र में दमदार उपस्थिति दर्ज करा रही है, जो सामान्य तौर पर पुरुष प्रधान काम माने जाते थे। रेलवे ने भी बेटियों की हिम्मत, कौशल और दक्षता को सलाम किया है।
 

4 of 7
शताब्दी एक्सप्रेस - फोटो : फाइल फोटो
काठगोदाम से नई दिल्ली के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस में सुनीता कुमारी, अंजू सिंह, रेनू श्रीवास, आकांक्षा और रीना को सहायक लोको पायलट के तौर पर तैनाती दी गई है।
 
विज्ञापन

5 of 7
sunita kumari - फोटो : amar ujala
सुनीता कुमारी कहती हैं कि ट्रेन को चलाने में गौरव का अहसास होता है। उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें अपने सहयोगियों के माध्यम से पूरा किया जाता है। कई चुनौतियां भी आती हैं। शुरुआत में डर लगा था, अब सामंजस्य बैठा लिया है।
 
विज्ञापन

6 of 7
शताब्दी के लोको पायलट जगमोहन कहते हैं कि बेटियां कुशलतापूर्वक ट्रेनों का संचालन में सहयोग कर रही हैं, जहां कोई दिक्कत आती है, सभी मदद के लिए तैयार रहते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
train accident
काठगोदाम स्टेशन प्रबंधक चयन राय कहते हैं कि अन्य जगहों पर भी बेटियां ट्रेन को चला रही हैं, लेकिन कुमाऊं की यह पहली ट्रेन है, जिसकी कमान बेटियों को सौंपी गई है। रेलवे ने सबसे वीआईपी ट्रेन का संचालन बेटियों को दिया है। यह गौरव की बात है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें