कुम्हार राजकुमार
- फोटो : अमर उजाला
आंगन के बाहर रोड साइड पर उनकी दुकान भी है। दुकान पर मिट्टी के गमलों से लेकर मटका, सुराही और अन्य बर्तन बिकते हैं। कालेज से घर पहुंचने पर किशन दुकान पर बैठकर पढ़ने के साथ बर्तनों को बेचता है। किशन कहता है उसके पिता उसके नायक हैं। उसे पढ़ाने के लिए बहुत कष्ट सहते हैं। राजकुमार प्रजापति की रोजी-रोटी चलाने के लिए भेल मददगार बना है। राजकुमार बताते हैं उनके पिता के वक्त 1968 से भेल के लिए गमलों की सप्लाई देते आ रहे हैं। आज भी भेल की डिमांड पर गमले बनाकर देते हैं। अपनी दुकान से गमला 60 रुपये का बेचते हैं, वहीं गमला बाजार में 80 रुपये का बिकता है।