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बॉर्डर एरिया में चीन की तैयारी के सामने भारत फिसड्डी, ये है हकीकत

Fri, 02 Sep 2016 08:22 AM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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china border area tibet - फोटो : AmarUjala
सीमांत इलाकों को बफर जोन के रूप में विकसित करने के दावों को धरातल पर कितना उतारा जा रहा है यह कैलाश यात्रियों के हवाले से सामने आया है। हाल यह है कि उत्तराखंड में भारत और चीन सीमा के इलाकों में चीनी क्षेत्र वाई फाई हो चुका है और भारतीय इलाकों में हेलो कहने तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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china border area tibet - फोटो : AmarUjala
पिछले सात साल में चीन सीमा तक सड़क पहुंचा चुका है और भारतीय क्षेत्र में 58 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है। कैलास यात्रा के लिए इस बार 18 दलों को स्वीकृति दी गई थी। अब यहां पहुंचे 16वें दल के यात्रियों का यात्रा का अनुभव बता रहा है कि सीमा पर दोनों देशों की गतिविधि में क्या अंतर है।
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kailash mansarovar yatra - फोटो : AmarUjala
तीर्थ यात्री गाजियाबाद के संजीव त्यागी के मुताबिक कैलास मानसरोवर के नजदीक डोलमा पास तक जीप चलती है। कपूरथला पंजाब के यात्री विनोद कुमार के मुताबिक परिक्रमा समेत चीन में केवल 46 किमी पैदल चलना पड़ता है। भारतीय क्षेत्र में 58 किमी की दूरी तो सीमा तक पहुंचने में तय करनी पड़ती है।

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कैलाश यात्रा - फोटो : फाइल
यह तब है जबकि चीन सीमा तक सड़क बनाने का काम भारत में वर्ष 1991 से चल रहा है। 85 किमी लंबी सड़क को वर्ष 2014 तक बनाने का लक्ष्य था। भारतीय क्षेत्र में धारचूला से आगे गर्बाधार से छियालेख तक 28 किमी हिस्से में सड़क खोदने का काम शुरू नहीं हुआ है। नाभीढांग से लिपुलेख दर्रे तक सात किमी हिस्से में सड़क नहीं बनी है।
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कैलास मानसरोवर - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल निवासी रिटायर्ड कमांडर एमआर शर्मा बताते है कि वह वर्ष 2009 में भी कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए थे, तब तिब्बत में भी संचार सेवा खस्ताहाल थी। फोन करने के लिए चीन के डाकघरों में जाना पड़ता था। इस बार चीन की सीमा पर प्रवेश करते ही वाईफाई की सेवा मिलने लग गई। 
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कैलास मानसरोवर - फोटो : file photo
नाथुला से बेहतर लिपूपास रूट

16वें दल के यात्री लिपूपास को कैलास मानसरोवर दर्शन के लिए बेहतर मानते हैं। यात्रियों का कहना था कि लिपूपास से होकर जाने में ऊं पर्वत, नारायण आश्रम, जागेश्वर धाम दर्शन का लाभ मिलता है। यह इलाका काफी खूबसूरत है।
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d - फोटो : getty images
नाथुला दर्रे से वाहनों के जरिए सीधे चीन में प्रवेश हो जाता है। यात्री नारायण आश्रम वाली सड़क को दुरुस्त न रखने से नाराज दिखे। नारायण आश्रम जाने वाली सड़क बंद होने से इस साल 18 दलों में से केवल 6 दल नारायण आश्रम के दर्शन कर सके।
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