हाथियों में भावनाएं किस कदर होती हैं ये तब दिखा जब उत्तराखंड के काशीपुर क्षेत्र में हाथी की ट्रेन से टकराकर मौत के बाद उसके दो साथियों ने करीब एक घंटे तक उत्पात मचाया। यही नहीं जिस दिशा को ट्रेन गई, हाथी उसके पीछे-पीछे कुछ दूरी तक दौड़े।
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railway pillar
- फोटो : AmarUjala
जब ट्रेन निकल गई तो उन्होंने गुस्सा निकालते हुए पटरी किनारे लगे दो पिलर गिरा दिए। हाथियों को भगाने के लिए ग्रामीण और वनकर्मियों को शोरगुल के साथ ही हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी।
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elephant died
- फोटो : AmarUjala
हाथी को सामाजिक जानवर माना जाता है। अगर झुंड से कोई हाथी बिछुड़ गया या गड्ढे में कोई बच्चा फंस जाता है तो झुंड के सारे हाथी मिलकर उसे मुसीबत से बाहर निकालने को खड़े हो जाते हैं। वे अपने साथी की मौत पर इंसानों की तरह दुख और गुस्सा जताते हैं।
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elephant died
- फोटो : AmarUjala
ऐसा ही हुआ जब उत्तराखंड के काशीपुर में गोपीपुरा के पास हाथी की कॉर्बेट लिंक एक्सप्रेस से टकराकर मौत हो गई। इसके बाद दो हाथियों ने जमकर गुस्सा दिखाया। वे पहले तो मृत हाथी के पास खड़े होकर काफी देर तक चिंघाड़ते रहे। फिर चिंघाड़ते हुए जिस दिशा में ट्रेन गई थी उस और दौड़े।
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हाथी का पोस्टमार्टम देखते लोग
- फोटो : AmarUjala
उन्होंने रास्ते में आए दो पिलर भी टक्कर मारकर तिरछे कर दिए। हाथियों के गुस्से से ग्रामीण भी कांप उठे। उन्होंने वनकर्मियों के साथ हाथियों को भगाने की कोशिश की, मगर वे काफी देर तक चिंघाड़ते रहे। बताया जा रहा है कि गौशाला स्टेशन का स्टाफ भी हाथियों को देखकर सहम गया था।
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elephant
वन्यजीव विशेषज्ञ एजी इंसारी ने बताया कि हाथी संवेदनशील जानवर होता है। उसका व्यवहार मानव से काफी मिलता-जुलता रहता है। झुंड में मुश्किल में फंसे हाथी की मदद के लिए बाकी हाथी बेहद तत्परता से आगे आते हैं। साथी हाथी के शव को झुंड दो-तीन दिन तक नहीं छोड़ता है।
ब्रिटिश काल में पश्चिम बंगाल में बच्चे की मौत से गुस्साई हथिनी ने इंजन को पटरी से नीचे गिरा दिया था। कुछ साल पहले कॉर्बेट पार्क में बच्चे की मौत के बाद हथिनी तीन दिन तक उसी के पास रही। हवाई फायर कर उसे शव से हटाया जा सका था।