कार्लीगाढ़, मजाड़ा में आई आपदा में टूटे सुमेरचंद और प्रेम का मकान
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पीड़ित परिवारों को किया जाए विस्थापित
आपदा प्रभावित विजय रावत ने कहा पहाड़ का हिस्सा फटा तो मलबे ने तबाही मचा दी है। उसके बाद से पहाड़ कमजोर हो गया है। अब स्थिति यह है कि यदि बादल भी आ जाते हैं मजाड़ा में लोगों की नींद उड़ जाती है। लोगों ने कहा कि प्रशासन को स्थानीय लोगों को दूसरी जगह विस्थापित करना चाहिए क्योंकि अब यहां रहना सुरक्षित नहीं है।
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हमें अब यहां डर लगता है। मकान की स्थिति भी ठीक नहीं है। इतना मुआवजा नहीं मिला कि हम नया मकान बना सके। सरकार को मदद करनी चाहिए। - सुक्की
आपदा को एक महीना बीता है लेकिन आज भी डर है कि कहीं दोबारा ऐसा ना हो जाए। दीपावली किस तरह मनाएंगे जब हमारे पड़ोसी के यहां ही दीपावली नहीं मनेगी।- श्वारी देवी
आपदा के बाद से कोई भी त्योहार मनाने का मन नहीं है। जब उस दिन की याद आ जाती है तो रूह कांप जाती है। -कृपाल सिंह
मेरा बेटा आपदा में कहीं चला गया है। काश वो लौट आए, मेरे लिए बस वही दीवाली है। उसी की राह ताक रहे हैं। -मोहर सिंह
हमारे गांव की खुशियां कहीं खो गई हैं। हम इस बार दीवाली नहीं मनाएंगे क्योंकि उत्सव मनाने जैसा कुछ गांव में बचा ही नहीं। -विजय रावत
बहुत से लोगों को मुआवजा नहीं मिला है या फिर कम मिला है। सरकार को नियमानुसार मुआवजा वितरित करना चाहिए। -वीर सिंह