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शोध में खुलासा: केदारनाथ के बाद अब उत्तराखंड के इस शहर में होगी बड़ी ताबाही!

Sat, 16 Sep 2017 08:20 AM IST
जितेंद्र पपनै/ अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल)
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most horrible photos of kedarnath disaster - फोटो : file photo
अगर अभी नहीं चेते तो उत्तराखंड के रामनगर में भी केदारनाथ, मालपा, उत्तरकाशी की तरह बड़ी आपदा आ सकती है। एक शोध में यह बात सामने आई है।
 
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नदी द्वारा हो रही कटान
एक शोध के मुताबिक शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी और कोसी नदी के किनारे बसे रामनगर में दोनों तरफ से खतरा बढ़ रहा है। यहां अनियोजित कॉलोनियों के बसने से पहाड़ से आने वाले बरसाती नालों और कोसी नदी का रास्ता संकरा होता जा रहा है। लंदन से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका जियोमेट्रिक्स ऑफ नेचुरल हैजार्ड एंड रिस्क के 22 मार्च 2017 के अंक में भूगर्भशास्त्री कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. चारु पंत और पर्वत विकास के लिए एकीकृत अंतरराष्ट्रीय केंद्र (आईसीआईएमओडी) के अतिथि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप रावत का शोध पत्र छपा है।

 
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disaster
शोध पत्र के लिए उन्होंने रामनगर क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना, धरातलीय बनावट (भूआकृति), नदी, नालों का बहाव (हाइड्रोलॉजी), जलवायु परिवर्तन, अनियोजित शहरीकरण के उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का प्रयोग कर विस्तृत अध्ययन किया है। शोध में पाया गया कि कॉर्बेट पार्क की शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी (फुटहिल्स) में बसी कॉलोनियां (रानीखेत रोड, उत्तरी खताड़ी, चोरपानी, गौजानी, करनपुर, कानिया, हिम्मतपुर), कोसी नदी के दाएं किनारे पर बसी कॉलोनियां (पंपापुरी, दुर्गापुरी, भरतपुरी, टेड़ा रोड, भगुवाबंगर, पूछड़ी, शंकरपुर) त्वरित बाढ़ के लिए अतिसंवेदनशील हैं, जबकि समतल क्षेत्र की कॉलोनियां (चिल्किया, टांडा, पीरूमदारा आदि) जलनिकास की कमी के कारण अति संवेदनशील हैं।

 

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flood
शोध में पिछले 30 वर्षों के आंकड़ों के अध्ययन से निष्कर्ष निकला है कि जलवायु परिवर्तन के कारण रामनगर क्षेत्र में अतिवृष्टि, बाढ़ की घटनाएं प्रतिवर्ष चार प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं। वहीं अनियोजित शहरीकरण के कारण करीब तीन प्रतिशत जनसंख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है। परिणामस्वरूप 1.25 प्रतिशत की वार्षिक दर से बाढ़ का खतरा संवेदनशील क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। अत: इन सभी बाढ़ संवेदनशील क्षेत्रों में अनियोजित शहरीकरण का भू-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नियोजन जरूरी है।

 
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flood - फोटो : amarujala
डॉ. प्रदीप रावत ने बताया कि भरतपुरी, पंपापुरी, दुर्गापुरी के क्षेत्र में कोसी के साथ-साथ कार्बेट क्षेत्र की तरफ से भी बरसाती नाले आते हैं। इस क्षेत्र में लगातार कॉलोनियां बस रही हैं। ऐसे में बादल फटने और नदी का जलस्तर बढ़ने से दोनों तरफ से लोग घिर जाएंगे तो बड़ी तबाही हो सकती है।

 
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flood
इन क्षेत्रों में है खतरा
1. कम बाढ़ वाले क्षेत्र - कार्बेट पार्क, आमडंडा  
2. सामान्य बाढ़ वाले क्षेत्र - तल्ला कानियां, मेन मार्केट, भवानीगंज, शिवलालपुर, शंकरपुर, बैड़ाझाल, नया गांव, भगुवाबंगर, चिल्किया, टांडा 
3. अधिक बाढ़ वाले क्षेत्र - नंदपुर, पीरूमदारा, बसई, करनपुर, टेड़ा, बैराज  
4. अत्यधिक बाढ़ वाले क्षेत्र - पंपापुरी, भरतपुरी, दुर्गापुरी, लखनपुर, खताड़ी, चोरपानी, गौजानी, कानियां, हिम्मतपुर, छोई, किशनपुर 
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