तीर्थनगरी ऋषिकेश की अंजना ने दोनों हाथ और एक पैर विकलांग होने के बाद भी हार नहीं मानी। आज वह अपनी मेहनत और लगन से दूसरों के लिए नजीर साबित हो रही है।
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मायाकुंड की 28 वर्षीय अंजना दोनों हाथ और एक पैर विकलांग होने के बाद भी अंजना दूसरों के लिए प्रेरणा बनी है। उसके पैर से बनाई गई कलाकृतियों को देख हर कोई दंग रह जाता है।
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दोनों हाथ नहीं, फिर भी बनाती है सुंदर तस्वीरें, देखने वालों की लगती है भीड़
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अंजना को इन कलाकृतियों के बनाने से जो भी कोई अपनी खुशी से मेहनताना देता है। उसे वह खुशी खुशी स्वीकार कर लेती है। इसी की बदौलत वह अपने बूढ़े मां बाप की देखभाल और दो भतीजों की पढ़ाई का खर्च वहन करती है।
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अंजना बताती है कि बचपन से ही उसके दोनों हाथ और एक पैर विकलांग है। पिता और माता अब बुजुर्ग हो चुके है। छोटे भाई की शादी हुई, लेकिन फिर वह अपने बच्चों के साथ अलग रहने लगा। घर का खर्च वहन करने को उसने विकलांगता को मात देकर दो साल पूर्व एक स्थानीय महिला से कलाकृतियां बनानी सीखी।
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अब वह पैर से इस तरह की कलाकृतियां बनाती है कि वहां से गुजरने वाला हर शख्स रुकने को मजबूर हो जाता है। महिलाए तो दूर दूर से उससे भगवान जी के पोस्टर बनवाने आती है। अंजना ने बताया कि उन्हें विकलांग होने का कोई मलाल नहीं है। कहा यदि इंसान के पास हुनर और कला है तो वह जिंदगी को आराम से गुजार सकता है। लेकिन वह सरकारी सिस्टम पर तीखा व्यंग करती है।
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कहती है कि उनका परिवार पंद्रह सालों से किराए के मकान में रहता है। वह अपने परिवार को आर्थिक मदद के लिए कई बार स्थानीय प्रशासन से गुहार लगा चुकी है। लेकिन उसकी फरियाद किसी ने नहीं सुनी। छोटा भाई शादी के बाद भले ही अपने बच्चों के साथ अलग रहने लगा हो, लेकिन अंजना अपने बड़े होने का फर्ज बखूबी निभा रही है। छोटा भाई मजदूरी करता है और परिवार का खर्च चलाने में असमर्थ है। इसीलिए वह अपने दो भतीजों की पढ़ाई का खर्च स्वयं वहन करती है।