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अद्भुत और अनोखी है यह परंपरा, तस्वीरों में देखिए कैसे धधकते अंगारों पर नाच उठे देवता

Mon, 15 Apr 2019 08:38 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुप्तकाशी
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जाख देवता - फोटो : अमर उजाला
जाखधार में लगने वाले जाख मेले में यक्षराज जाख देवता ने अंगारों से धधक रहे अग्निकुंड में प्रवेश कर नृत्य किया। तस्वीरों में देखिए ये 1100 साल पुरानी अद्भुत और अनोखी परंपरा...
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जाख देवता - फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर पूरी केदारघाटी आराध्य के जयकारों से गूंज उठी। कुछ पल के इस दिव्य दृश्य के साक्षी बने हजारों श्रद्धालुओं ने जाख देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया। 
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जाख देवता - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उत्तराखंड में तीन दिवसीय जाख मेले में अंतिम दिन सोमवार भगवान यक्षराज जाख देवता के पश्वा श्रद्धालुओं के साथ ढोल-दमाऊं और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नारायणकोटि गांव से नृत्य करते हुए कोठेड़ा और देवशाल गांव के विंदवासिनी मंदिर से दोपहर को जाख मंदिर पहुंचे। 

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जाख देवता - फोटो : अमर उजाला
यहां पर पुजारियों द्वारा आराध्य की विशेष पूजा की गई। इस मौके पर ढोल-दमाऊं व अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों और गीतों के साथ देवता का आह्वान किया गया। जहां भगवान यक्षराज अपने पश्वा पर अवतरित होते हुए सीधे मंदिर के द्वार पर पहुंचे। 
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जाख देवता - फोटो : अमर उजाला
देवता ने पूरे कुंड का चक्कर लगाया। इस दृश्य को देखने के लिए सुबह से ही केदारघाटी व अन्य क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए थे।
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जाख देवता - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
आचार्य स्वयंवर सेमवाल, भोपाल सिंह, आत्माराम बहुगुणा, हर्षबद्धन देवशाली, विनोद, मनोहर देवशाली, रेवतीनंद देवशाली ने जाख क्षेत्र के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेले के सफल आयोजन के लिए क्षेत्रवासियों का आभार जताया।
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जाख देवता - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
इससे पूर्व रविवार को कोठेडा के पुजारियों, देवशाल के वेदपाठियों व नारायणकोटी के ग्रामीणों व भक्तों द्वारा जाख मंदिर परिसर में धार्मिक विधि-विधान के साथ अग्निकुंड की रचना की गई थी। 
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