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नारी निकेतन: दुष्कर्म, गर्भपात और फिर भ्रूण को लगाया था ठिकाने, जानें केस से जुड़ी 10 बड़ी बातें

Tue, 03 Sep 2019 08:21 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी से दुष्कर्म, गर्भपात कराने और भ्रूण को ठिकाने लगाने के आरोप में अदालत ने शुक्रवार को सभी नौ आरोपियों को दोषी करार किया है। अपर जिला जज षष्ठम धर्म सिंह की अदालत सोमवार को सजा का एलान करेगी। दोषी करार हुए आरोपियों में तत्कालीन अधीक्षिका समेत छह महिलाएं शामिल हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला ने गुमनाम पत्र से किया था खुलासा
अमर उजाला को अक्टूबर 2015 में एक गुमनाम पत्र मिला था। जिसके बाद अमर उजाला ने नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी के साथ अनहोनी की घटना का खुलासा किया था। सूचना पुख्ता थी इसके आधार पर पुलिस भी हरकत में आई और नेहरू कॉलोनी थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद 24 नवंबर 2015 को मुख्यमंत्री के आदेश पर तत्कालीन एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया। 
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- फोटो : अमर उजाला
एसआईटी की जांच में खुली परतें
एसआईटी की जांच में एक-एक कर सभी परतें खुलती चली गईं और संवासिनी पर जुल्म ढाने वाले दरिंदे सलाखों के पीछे जाते रहे। इस मामले में पुलिस ने नारी निकेतन की तत्कालीन अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल, कर्मचारी अनिता मंदोला, क्राफ्ट टीचर शमा निगार, चंद्रकला क्षेत्री, संविदाकर्मी कृष्णकांत उर्फ कांछा, होमगार्ड ललित बिष्ट, केयर टेकर हाशिम और सफाई कर्मचारी गुरदास को गिरफ्तार किया था। 

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- फोटो : अमर उजाला
सफाई कर्मचारी निकला मुख्य आरोपी
गुरदास पर आरोप था कि उसने संवासिनी से दुष्कर्म किया, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई थी। जांच हुई तो सच्चाई का खुलासा हो गया। गुरदास पर आईपीसी 376 सी (किसी संस्था या संस्थान के संरक्षण में रह रही महिला या युवती से दुष्कर्म करना), ललित बिष्ट व हाशिम पर आईपीसी 376सी/511(किसी संस्था या संस्थान के संरक्षण में रह रही महिला या युवती से दुष्कर्म का प्रयास करना),  मीनाक्षी पोखरियाल पर आईपीसी 201 (अपराध के बाद साक्ष्य मिटाना। इन्होंने भ्रूण को ठिकाने लगाया।), समा निगार, किरण नौटियाल, अनिता मंदोला और चंद्रकला क्षेत्री- आईपीसी 313 (स्त्री की मर्जी के बगैर गर्भपात कराना), 201(अपराध के बाद साक्ष्य मिटाना) और आईपीसी 120बी (आपराधिक षड्यंत्र रचना) धारा लगी हैं। 
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- फोटो : अमर उजाला
जंगल में दबा दिया था भ्रूण
होमगार्ड ललित बिष्ट और केयर टेकर हाशिम ने भी संवासिनी से दुष्कर्म का प्रयास किया था। इस बात का कहीं पता न चले इसके लिए बाकी सभी ने आपराधिक षडयंत्र रचते हुए संवासिनी का गर्भपात कराया और भ्रूण को जंगल में दबा दिया। एसआईटी ने दुधली के जंगल से भ्रूण भी बरामद कर लिया था। 
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- फोटो : अमर उजाला
डीएनए रिपोर्ट से हुआ था खुलासा
 जांच के लिए पुलिस ने आरोपियों के साथ भ्रूण का डीएनए टेस्ट कराया था। इसका मिलान गुरदास के साथ हुआ, जिससे केस को और मजबूती मिल गई। शासकीय अधिवक्ता संजीव सिसौदिया ने बताया कि अभियोजन की ओर से इस मुकदमे में कुल 23 गवाह पेश किए गए। जबकि, न्यायालय ने डीएनए रिपोर्ट को महत्वपूर्ण तथ्य माना और सभी पहलुओं पर गौर करते हुए सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दे दिया। सिसौदिया ने बताया कि सजा पर सोमवार को बहस होगी। सभी दोषियों को न्यायालय परिसर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
घटना के बाद जागी सरकार
इस खुलासे के बाद शासन की नींद टूटी तो सुधार की प्रकिया शुरू हुई। मानसिक रोगी संवासिनी और मूक-बधिर को अलग-अलग करने के साथ मेडिकल व्यवस्था में सुधार हुआ। मूक-बधिर की भाषा समझने के लिए अलग से एक्सपर्ट रखे गए। यही नहीं संवासिनी को नियमित योग कराने के साथ उन्हें धूप बत्ती, कैंडल आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। 

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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा
हाईकोर्ट की अधिवक्ता शिवानी गंगवार ने जनहित याचिका दाखिल की थी। इसमें नारी निकेतन, देहरादून और राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान जैसी संस्थाओं में महिलाओं और दिव्यांगों के साथ हो रहे शोषण पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। जिसके बाद याचिका के निस्तारण में कोर्ट ने सरकार को छह माह में जुवेनाइल जस्टिस रूल्स बनाने को भी कहा था। इसके साथ मूक-बधिर महिला से बलात्कार और गर्भपात मामले में हाईकोर्ट ने पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा अथवा 11 हजार रुपये प्रतिमाह आजीवन पेंशन देने का आदेश प्रदेश सरकार को दिया था। 

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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
मीडिया कर्मियों पर हुई थी पत्थरबाजी
मामाले की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी झरना कमठान की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय टीम की मौजूदगी में संवासिनियों ने जमकर हंगामा किया था उन्होंने मीडियाकर्मियों पर पत्थरबाजी भी की। यही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों से भी बदसलूकी भी हुई थी। पत्थरबाजी में एक मीडियाकर्मी का हाथ भी जख्मी हो गया था।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
वीडियो रिकार्डिंग भी आई थी सामने
अमर उजाला टीम ने जब इस मामले को प्रकाशित किया तो जिला प्रबोशन अधिकारी मीना बिष्ट ने मामले को सिरे से नकार दिया था। उसी दिन महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने वहां का भ्रमण किया तो नारी निकेतन में कुछ ना होने की एक तरफा रिपोर्ट जारी कर दी थी। लेकिन अमर उजाला ने नारी निकेतन में तीन मूक-बधिर संवासिनियों की वीडियो रिकार्डिंग को लेकर मूक-बधिर सांकेतिक भाषा के विशेषज्ञों की राय की रिपोर्ट को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसमें नारी निकेतन में अपराध होने के साफ संकेत मिले, तब जाकर कहीं मामले को दबाने में लगे लोग बैकफुट पर आए। 
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