सहस्त्रधारा के ऊपर बसे गांवों मजाडा, चामासारी और जमाडा में बादल फटने से मची तबाही के बाद कई परिवार सुरक्षित स्थानों के लिए पैदल ही निकल पड़े। इस दौरान उनके साथ मौजूद छोटे बच्चों को घंटों तक भूखे रहना पड़ा और जान जोखिम में डालकर पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ा।
जमाडा गांव की सुषमा, निशा और पूजा ने बताया कि रात में बादल फटने के बाद वे अपने पूरे परिवार के साथ घर छोड़कर भागे। इस दौरान उनका घर और खाने-पीने का सारा सामान मलबे में बह गया। उनके साथ नौ बच्चे भी थे जिन्हें पांच घंटे तक दूध नहीं मिल पाया।