कोरोना महामारी के बीच हरिद्वार के चंडी घाट श्मशान घाट में शवों के दाह संस्कार करने में लापरवाही का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि कर्मचारी शवों को आधा अधूरा जलाकर छोड़ दे रहे हैं, जिससे शिकारी कुत्ते शवों के अंगों को उठाकर ले जा रहे हैं। गंगा नदी पर चंडी घाट पुल के नीचे नया श्मशान घाट बनाया गया है। इसके संचालन का जिम्मा तिरुपति कृषि उत्पादन उर्वरक विपणन समिति कोटद्वार को दिया गया है। आरोप है कि कर्मचारियों की ओर से शवों के दाह संस्कार करने में लापरवाही बरती जा रही है। यहां रह रहे एक अघोरी बाबा के पास देहरादून से पहुंचीं माता राजराजेश्वरी ने कुत्तों को शवों के अंग खाते देख कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि जब तब मृतकों के परिजन रहते हैं, कर्मचारी शवों को जलाते रहते हैं। उनके जाने के बाद शवों को अधजला छोड़ दिया जाता है। शवों के पूरी तरह से जलने से पहले ही कर्मचारी वहां से हट जाते हैं, जिससे कुत्ते शवों के अंगों को खींचकर ले जाते हैं और दिनभर उन्हें नोचते हैं। आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार में कर्मकांड की विधि भी पूरी नहीं अपनाई जा रही है। उन्होंने दाह संस्कार के लिए लगाए गए कर्मचारियों को हटाकर दूसरों को रखने की मांग की है।