पंतजलि योगपीठ की विश्वस्तरीय चार प्रयोगशालाओं में देशभर से जुटे 500 वैज्ञानिक इस काम में लगे हैं। क्लीनिकल ट्रायल विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भेजी गई गाइड लाइन के हिसाब से किया जा रहा है। योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि विश्व में पतंजलि ऐसी संस्था बन गई है, जिसे इन ट्रायल के लिए भारत सरकार से एनएबीएल प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। यह प्रमाणपत्र अब तक केवल एलोपैथिक अनुसंधानशालाओं को दिया जाता था। शास्त्रों में वर्णित दवाएं रोगी पर कैसे काम करती हैं, इसका पूरा ब्योरा रखा जा रहा है। साथ ही दो, तीन और चार जड़ी बूटियों को मिलाकर नए योग, मिश्रित औषधि और भस्म तैयार की जा रही है। चिकित्सा की भाषा में इस कार्य को रिवर्स फार्मा कहा जाता है।