चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद अब बाबा केदार के धाम में रौनक दिखने लगी है। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर छोटी लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट के बीच अब भी विशालकाय हिमखंड पसरे हुए हैं। तीर्थयात्री इन्हीं हिमखंडों के बीच से होकर बाबा के धाम पहुंच रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
वहीं, इन स्थानों पर बर्फ पिघलने से पानी रिस रहा है, जिससे फिसलन हो रही है। साथ ही हिमखंड के ऊपरी तरफ से बर्फ टूटकर गिर रही है। जोकि आवाजाही के लिए खतरा है। 29 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाटोद्घाटन के दौरान भी केदारपुरी चार फीट से अधिक बर्फ से ढकी हुई थी।
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पैदल मार्ग भी बर्फ से लकदक बना हुआ था और नौ स्थानों पर विशालकाय हिमखंड फैले हुए थे, जिसमें चार अब भी मौजूद हैं। 20 से 35 फीट लंबाई में फैले ये हिमखंड लिनचोली, छानी कैंप के समीप, हथनी गदेरा, भैरव गदेरा में मौजूद हैं।
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पैदल मार्ग पर लगातार आवाजाही से इन स्थानों पर खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में बाबा के दर्शन को धाम पहुंच रहे और वहां से लौट रहे श्रद्धालुओं को रास्ता पार करने में दिक्कतें हो रही हैं।
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केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य कर रही वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी के टीम प्रभारी मनोज सेमवाल ने बताया कि हिमखंड जोन रास्ते को सुलभ व सुरक्षित बनाने के लिए बर्फ को काटा जा रहा है। इस कार्य के लिए यहां पर रोस्टर के हिसाब से 20 से अधिक मजदूरों को तैनात किया जा रहा है।
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सोमवार को 309 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। इस यात्राकाल में यह एक दिन में दर्शनार्थियों की सबसे अधिक संख्या है। उधर, सोनप्रयाग से 397 श्रद्धालुओं ने केदारनाथ के लिए प्रस्थान किया। सुबह से ही केदारनाथ मंदिर में भक्तों की चहलकदमी होने लगी थी। सुहाने मौसम के बीच सुबह दस बजे तक परिसर में काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए थे।
इस दौरान मंदिर के कर्मचारियों ने उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड के निर्देशों के तहत भक्तों को दर्शन कराए। बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि सोमवार को दर्शन करने वालों में 290 पुरुष, 17 महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बीते 12 जून से अभी तक धाम में कुल 1785 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर पुण्य अर्जित कर चुके हैं।