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बदरीनाथ के पहाड़ों में उगाई जाने वाली हल्दी लोगों के लिए साबित हो रही वरदान

Mon, 13 Jul 2020 12:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal कुंदन बिष्ट, अमर उजाला, काशीपुर
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बदरीनाथ
आईआईएम काशीपुर का एक स्टार्टअप कुछ ऐसा कर रहा है जो हर वर्ग के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। बदरीनाथ के पहाड़ों में उगाई जाने वाली हल्दी से हल्दी विटा उत्पाद बनाया गया है। यह एक सुवर्ण हल्दी है जो 16 से 18 महीनों में विकसित होती है। इसे आसान भाषा में बूढ़ी हल्दी भी कहा जाता है।
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हम सभी जानते हैं की हल्दी का महत्व हमारे जीवन में बहुत है और यह हमारे लिए बहुत ही लाभदायक है, पर क्या कभी सोचा है कि इस पर भी एक स्टार्टअप बन सकता है। आईआईएम काशीपुर का एक स्टार्टअप हल्दी विटा कुछ ऐसा कर रहा है जो हर वर्ग के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। 
 
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- फोटो : social media
समीर गुप्ता और अंकित खंडूरी ने दो साल के रिसर्च के बाद हल्दी विटा को स्टार्ट किया और लोगों को अपने प्रोडक्ट से बताया कि हल्दी का कितना महत्व है। समीर गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने खुद इसे 9 महीने तक स्वयं पर प्रयोग किया है, इसके प्रयोग से उनका हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज एकदम ठीक हो गया।

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उनके हल्दी विटा ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी अवॉर्ड जीते हैं जिसे आईआईएम काशीपुर ने सराहा है। अंकित की मानें तो यह एक ऐसा स्टार्टअप है जिससे उन्हें अपने पुराने भारत के आयुर्वेद को बरकरार रखने का मौका मिला।
 
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iim kashipur - फोटो : logo
आज वह ऑनलाइन की मदद से अपने भारतीय स्टार्टअप हल्दी विटा को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। आईआईएम काशीपुर फीड के सीईओ शिवानंद दास बताते हैं कि हल्दी विटा की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बच्चे भी दूध के साथ पीते हैं क्योंकि इसमें वो कच्ची हल्दी वाली महक नहीं आती। यही इसका सबसे बड़ा इनोवेशन है।
 
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पैसे - फोटो : pixabay
मूल रूप से पौड़ी के रहने वाले अंकित खंडूरी बताते हैं कि उन्होंने और जयपुर निवासी समीर ने वर्ष 2017 में अपना स्टार्टअप शुरू किया था। उनका मुख्य ऑफिस नोएडा में है लेकिन प्रोडक्शन समेत अन्य काम उत्तराखंड में ही होते है। उनके स्टार्टअप के माध्यम से 70 परिवार जुड़े हुए हैं। 
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- फोटो : Pixabay
उन्होंने बताया कि चमोली जिले के पीपलखोटी में हल्दी की खेती होती है। चूंकि हल्दी की फसल को चूहे, लंगूर और बंदर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं इसलिए इसकी खेती सबसे लाभदायक साबित होती है। खंडूरी ने बताया कि कोरोना काल में उनके उत्पाद की डिमांड अधिक हो गई है। जबकि माल की कमी हो गई है। 
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