फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एड गुरु बनने से पहले कुछ ऐसे रहते थे सेंसर बोर्ड ने नए चेयरमैन प्रसून जोशी

Sat, 12 Aug 2017 12:14 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 6
प्रसून जोशी
जाने माने कवि कवि, गीतकार और एड गुरु प्रसून जोशी को फिल्म सेंसर बोर्ड का चेयरमैन बनाए जाने से उत्तराखंड के लोग बेहद खुश हैं। आइए जानते हैं प्रसून के जीवन की कुछ अनकही बातें...

 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 6
prasoon joshi - फोटो : amar ujala
मूल रूप से अल्मोड़ा के जाखनदेवी मोहल्ले में रहने वाले प्रसून का अल्मोड़ा से गहरा लगाव रहा है। तारे जमी पर, रंग दे बसंती, फना जैसी हिट फिल्मों के गीतकार और विज्ञापन के क्षेत्र में अनूठे प्रयोगों के लिए अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित कर चुके प्रसून जोशी का जन्म अल्मोड़ा के जाखनदेवी मोहल्ले में हुआ। उनके पिता डीके जोशी शिक्षा विभाग में अधिकारी थे।

 
विज्ञापन

3 of 6
prashun joshi - फोटो : अमर उजाला
उनकी प्रारंभिक शिक्षा गोपेश्वर और नरेंद्रनगर गढ़वाल में हुई। गाजियाबाद से एमबीए करने के बाद वह 1992 में विज्ञापन की दुनियां से जुड़ गए। मूलत: वह कवि हैं। 1996 में उनका पहला एलबम अब के सावन आया निकला। वह तारे जमी पर, रंग दे बसंती, फना जैसी हिट फिल्मों के साथ ही एक दर्जन से अधिक चर्चित फिल्मों के लिए गीत लिख चुके हैं। उन्हें दो बार फिल्म फेयर और दो बार आइफा समेत कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
 

4 of 6
prasoon joshi
प्रसून जोशी के गीतों और विज्ञापनों में पहाड़ और प्रकृति का विशेष स्थान रहता है। उन्होंने अपने कई गीतों और विज्ञापनों में पहाड़ का चित्रण करने के साथ ही यहां के परिवेश को संजोया है। कुछ साल पहले अल्मोड़ा में अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा था कि किसी क्षण जब वह अटक जाते हैं तब प्रकृति का सहारा लेकर ही आगे बढ़ते हैं। उनका कहना था कि पहाड़ सबको अपना लेता है और इस अंचल ने उन्हें खुली सोच दी है।
 
विज्ञापन

5 of 6
prasoon joshi
प्रसून जोशी का जन्म उत्तराखंड में 1971 में हुआ। उन्हें विज्ञापन और फिल्म जगत के सम्मानित लोगों में गिना जाता है। उन्होंने कई फिल्मों के गाने, डायलॉग और स्क्र्तीनप्ले लिखे हैं। प्रसून ने 17 साल की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था। एमबीए करने के बाद प्रसून ने दस साल एक कंपनी में काम किया। फिर मैकैन एरिक्सन से जुड़े। आखिरकार राजकुमार संतोषी की फिल्म लज्जा से उन्हें फिल्मों में एंट्री मिली।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
आमिर खान - फोटो : self
लेखक, गीतकार, एड गुरु और मार्केटिंग इंडस्ट्री की मशहूर शख्सियत हैं। जोशी को दो बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। ये अवार्ड उन्हें तारे जमीं पर और चिटगॉन्ग फिल्मों के गीतों के लिए दिया गया है। 2015 में कला, साहित्य और एडवरटाइजिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें