मुफलिसी में जिंदगी गुजारने वाले बुमराह दादा संतोख सिंह एक जमाने में हाईप्रोफाइल उद्योगपति थे। लेकिन इस वजह से उन्हें अपना सारा बिजनेस कौड़ियों के दाम बेचना पड़ा।
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कभी गुजरात के अहमदाबाद मे बटवा इंडस्ट्रियल स्टेट में संतोख सिंह बुमराह का जलवा हुआ करता था। वो लग्ज़री कारों और प्लेन में सफर किया करते थे। सारा कारोबार क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह के पिता जसवीर सिंह बुमराह संभालते थे।
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2001 में बेटे की बीमारी के कारण मौत से संतोख सिंह टूट गए और फैक्ट्रियां भी आर्थिक संकट से घिर गई। बैंको का कर्ज़ा निबटाने के लिये उन्हें तीनो फेक्ट्रियों को बेचना पड़ा। उनकी शानदार ज़िन्दगी एक दम से ज़मीन पर आ गई।
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अपने सुनहरे दिनों की याद करते करते संतोख सिंह की बूढी आँखो मे आंसू छलक आते थे। इसके बाद साल 2006 में संतोख सिंह बुमराह उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के छोटे से कस्बे किच्छा में आ आ गए।
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वे एक छोटे से कमरे में रहकर और ऑटो चलाकर कर अपनी और अपने छोटे पोलियोग्रस्त बेटे की रोजी चला रहे थे। संतोख सिंह बुमराह आजकल बुढ़ापे में किच्छा में किराये के टूटे-फूटे कमरे में रह कर मुफलिसी की ज़िन्दगी काट रहे थे।
हालांकि ज़िन्दगी की आखरी दहलीज़ पर पहुंचे 84 साल के बुज़ुर्ग संतोख सिंह बुमराह को अपनी मुफ़लिस ज़िन्दगी से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन वे अपने पोते जसप्रीत से सबसे ज्यादा प्यार करते थे। वे सुसाइड करने से पहले भी उन्हीं से मिलने अहमदाबाद गए थे।