चमोली के पोखरी मुख्यालय से आठ किमी की दूरी पर स्थित डुंगर गांव में तीन सींग और तीन आंख वाला सांड इन दिनों कौतूहल का विषय बना हुआ है।
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PICS: कभी देखा है तीन सींग और तीन आंख वाला सांड
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ग्रामीण इसकी पूजा-अर्चना में जुट गए हैं। जबकि पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भाशय में अनियमित विकास के चलते ऐसे अतिरिक्त अंगों का विकास होता है। सांड मालिक रणजीत सिंह ने बताया कि वह मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है।
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सावन माह होने से इन दिनों उसकी गोशाला में भी सांड की पूजा-अर्चना के लिए शिव भक्तों का तांता लगा हुआ है। शुरू में सांड की तीसरी आंख और सींग नजर नहीं आ रहे थे।
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अब अंगों के विकसित होने के साथ ही सांड के तीन सींग स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, जबकि बांयी आंख के पास एक छोटी आंख का आकार भी उभरने लगा है। रणजीत सिंह का कहना है कि उसने 10 अगस्त को सांड को तृतीय केदार तुंगनाथ को अर्पित करने का निर्णय लिया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. लोकेश शर्मा के मुताबिक, गर्भाशय में अनियमित विकास के चलते अतिरिक्त अंगों का विकास होता है। गर्भाशय में आंख बनाने वाली कोशिका के अनियमित हो जाने पर भी तीसरी आंख विकसित हो जाती है। इस प्रकार की अनियमितता 10 हजार जानवरों में से एक में हो जाती है। इसे भगवान का रूप या दैवीय शक्ति नहीं माना जा सकता है। यह प्राकृतिक अनियमितता है।