दिशा स्वर वर्ग संख्या स्वामी
1- पूर्व दिशा अ से अ: तक 8 गरुड़
2- अग्निकोण क ख ग घ 5 बिल्ली
3- दक्षिण च छ ज झ 6 शेर
4- नैत्रत्य कोण ट ठ ड ढ 4 कुत्ता
5- पश्चिम त थ द ध न 7 नाग
6- वायव्य कोण प फ ब भ म 1 मूस
7- उत्तर य र ल व 3 हाथी
8- ईशान कोण स श ष ह 2 बकरी
इस प्रकार अ से अ: तक अक्षरों से शुरू हो रहे नाम वाले लोगों की प्रवृत्ति गरुड़ जैसी, संख्या सात और दिशा पूर्व होती है। दूसरे वर्ग वाले लोगों की प्रवृत्ति बिल्ली जैसी, संख्या 5 और दिशा अग्निकोण होती है। तीसरे वाले वर्ग वाले लोगों की प्रवृत्ति शेर जैसी, संख्या 6 और दिशा दक्षिण होती है। चौथे वर्ग वाले लोगों की प्रवृत्ति कुत्ता जैसी, संख्या 4 और दिशा नैत्रत्य कोण होती है। पांचवें वर्ग वाले लोगों की प्रवृत्ति नाग जैसी, संख्या 7 और दिशा पश्चिम होती है। छठवें वर्ग वाले लोगों की प्रवृत्ति मूस जैसी, संख्या 1 और दिशा वायव्य कोण होती है। सातवें वर्ग वाले लोगों की प्रवृत्ति हाथी जैसी, संख्या 3 और दिशा उत्तर होती है। आठवें वर्ग वाले लोगों की प्रवृत्ति हाथी बकरी, संख्या 2 और दिशा ईशान कोण होती है।
इसमें हर वर्ग का पांचवां स्थान उसका शत्रु है। मतलब उन दोनों वर्ग के अक्षर से शुरू हो रहे नाम वाले लड़का-लड़की को कभी विवाह नहीं करना चाहिए। जैसे- जिनका नाम अ से अ: तक के स्वरों से शुरू होता है।
उनका स्वामी गरुड़ है। अब यहां से नीचे की ओर पांचवीं दिशा पश्चिम को देखें। उसमें त थ द ध न स्वर अा रहे हैं। जिनका स्वामी नाग है।
इस प्रकार गरुड़ और नाग एक दूसरे के शत्रु हैं। ऐसे में इन दोनों स्वामी वाले वर्गों के अक्षरों से शुरू हो रहे नाम वाले लड़का-लड़की को आपस में विवाह नहीं करना चाहिए।
इसी प्रकार दूसरी दिशा अग्निकोण की स्वामी बिल्ली है। अब यहां से पांचवें स्थान तक गिनने पर वायव्य कोण दिशा आती है, जिसका स्वामी मूस है। तो दोनों के स्वरों से शुरू हो रहे नाम वाले लड़का-लड़की का विवाह नहीं होना चाहिए।
इसी प्रकार हर दिशा की शत्रु उसकी पांचवीं दिशा है। इसी प्रकार स्वामी शेर का शत्रु हाथी है। कुत्ता का शत्रु बकरी है। इसी तरह लड़का-लड़की के नाम का मिलान करना चाहिए। वहीं हर दिशा की तीसरी दिशा का स्वामी उदासीन तथा चौथी दिशा का स्वामी मित्र होता है। मसलन उन अक्षरों से शुरू हो रहे नाम वाले लड़का-लड़की का विवाह हो सकता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित बाबुलनाथ पांडे का कहना है कि सुख-दुख सभी के जीवन में अाता रहता है, लेकिन यदी नाम का मिलान कर विवाह न किया जाए तो वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल बनी रहती है। अधिकतर लोग इस बात से अंजान रहते हैं और कुंडली मिलान के बाद वर-वधू के गुणों का मिलान कर सतुंष्ट हो जाते हैं। कुंडली के साथ ही दोनों के नाम का भी मिलान करना चाहिए।