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अटल बिहारी वाजपेयी को खाने में पसंद थी ये चीजें, खरीदने के लिए लोगों के साथ लग जाते थे लाइन में

Sat, 18 Aug 2018 10:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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atal bihari vajpayee
उस दौर में राजधानी देहरादून में जनसंघ के प्रमुख लोगों में शुमार स्व. त्रिलोक चंद्र डाबर के यहां अटलजी का खासा आना-जाना था। उनके पुत्र विश्वास डाबर ने बताया कि अटलजी देहरादून आते थे तो उनके पिताजी के पास जरूर रुकते थे।
 
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अटलजी को चाट खाने का बहुत शौक था। 1981 में अटलजी देहरादून आए तो उनके घर पर ही रुके थे। अचानक उन्होंने इंद्रसेन की अपनी पसंदीदा चाट खाने की इच्छा व्यक्त की। डाबर ने कहा कि वह पैदल ही अटलजी को लेकर तिलक रोड स्थित इंद्रसेन की चाट की दुकान पर पहुंचे। वहां बहुत भीड़ थी।
 
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मैंने इंद्रसेन से कहा कि उनके साथ अटलजी आए हैं। चाट पहले खिला तो। इस पर इंद्रसेन ने कहा कि अगर इंदिरा गांधी खुद भी आ जाएं तो भी चाट तो नंबर से ही खिलाऊंगा। इस पर अटलजी बहुत तेजी से हंसे और उन्होंने लाइन में लगकर ही अपनी पसंदीदा चाट खाई।
 

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बहुमुखी प्रतिभा के धनी अटल बिहारी वाजपेयी खाने पीने के भी खासे शौकीन थे। वे कहा करते थे कि ब्राह्मण खाएगा नहीं तो जिएगा कैसे। हर साल हरिद्वार आने पर वे कभी इश्कलाल तो कभी ओम प्रकाश की चाट खाया करते थे। अरुण दलाल के कंधों पर हाथ रखकर वे चाट गली में जैन के गोल गप्पे भी बड़े शौक से खाते थे।
 
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गंगा सभा के कार्यालय में बैठे हों या जयपुरिया भवन में, हरिद्वार के जनसंघ वाले उनके लिए मथुरावाले की चंद्रकला जरूर लाते थे। अटल जी को बक्खर का रस भरी और खरबूजे के बीज वाली चंद्रकला बहुत भाती थी। अटल जी के हरिद्वार आने पर उनके समर्थक तत्कालीन जनसंघी प्यारेलाल भटेजा, राममूर्ती वीर, सोमदत्त श्रोत्रिय, जय प्रकाश सरायवाले आदि उन्हें कनखल के मंगल और ज्वालापुर के इश्कलाल की चाट जरूर खिलवाते थे।
 
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हरकी पैड़ी जाते हुए अटल जी सुभाष घाट पर लगे चाट बाजार में भी ओमप्रकश की चाट खा लेते थे। कभी हरकी पैडी जाते और कभी वहां से लौटते हुए अटल जी गऊ घाट चौराहे पर लाला टुईंयामल के कढ़ाए से कुल्हड़ में दूध जरूर पीते थे। अटल जी शुरू से ही खाने-पीने के शौकीन रहे हैं। उन्होंने हरिया हलवाई की पूड़ियां और मथुरावाले की तिकोनियां भी खूब खाई। तिकोनी के साथ मिलने वाली मेथी की मीठी चटनी भी उन्हें बहुत भाती थी। हरिद्वार वाले अटल जी के साथ-साथ उनके चटकारों को भी बरबस याद करते रहते हैं।
  
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शाहाबाद चुनाव प्रचार के लिए आए अटल बिहारी वाजपेयी डाकबंगले में भाजपा नेता गंगाभक्त सिंह के साथ नाश्ता करते हुए (फाइल फोटो)  - फोटो : अमर उजाला
हरिद्वार से विदा करते वक्त जनसंघ के नेता और पुरोहितगण उन्हें सौदान सिंह के पेड़ों का प्रसाद दिया करते थे लेकिन अटल जी कहते कि उन्हें तो इलायची के बीज वाला खांड से बना बड़ा इलायचीदाना अच्छा लगता है। वे खुद अपने पैसों से इलायचीदाना मंगवाते थे। हरकी पैड़ी से लौटते हुए अटल जी अपने हाथ से गंगाजली भरना कभी नहीं भूलते। वे हर साल गंगा जल भरकर अवश्य ले जाते थे। अटल जी जब सभाओं को संबोधित करने आते, तब भी यहां का प्रसाद और गंगा जल ले जाना नहीं भूलते। 
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