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Prediction 2019: 21 जनवरी के सुपर ब्लड वुल्फ मून की वजह से संकट में दुनिया के ये देश

Fri, 22 Feb 2019 11:46 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Super Blood Wolf Moon Eclipse
जयपुर के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश शर्मा ने नक्षत्रों की गणना के आधार पर बताया कि 21 जनवरी 2019 का चंद्र ग्रहण (सुपर ब्लड वुल्फ मून) जिसमें चंद्रमा पर लालिमा दिखी थी, उसका गहरा असर अब देखने को मिल रहा है। बताया कि वराह मिहिर जैसे गणितज्ञ ने अपनी पुस्तक वृहत्त संहिता में लिखा है कि जो ग्रह या नक्षत्र पिड़ित हो उसके क्षेत्राधिकार वाले देश में पीड़ा आती है।
 
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ज्योतिषशास्त्री सतीश शर्मा
पंडित सतीश शर्मा ने अमर उजाला से हुई बातचीत में ज्योतिषीय गणना के आधार पर यह दावा किया कि पूर्ण चंद्र ग्रहण पर और वो भी लाल चंद्रमा के दिन लंबा ग्रहण पड़ा। इसलिए गंधर्वराज चंद्रमा के गंधर्व प्रदेश में हिंसा का दौर देखने को मिल रहा है। इससे पहले 6 जनवरी को सूर्य ग्रहण हुआ था। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में यह ग्रहण हुआ और सिंध प्रदेश में पीड़ा आने का संकेत हुआ।
 
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Super Moon - फोटो : Facebook
उन्होंने बताया पौराणिक कथन है कि ब्रह्मा चंद्रमा को दिक्पाल या लोकपाल बनाना चाहते थे। उसके लिए उन्हें देवता या राजा होना जरूरी था। ब्रह्मा की वंशावली में चंद्रमा अत्रि पुत्र हैं। ब्रह्मा ने कृपा करके चंद्रमा को गंधर्वराज नियुक्त कर दिया। उस गंधर्व प्रदेश की राजधानी गांधार थी जो आजकल अफगानिस्तान का कंधार प्रदेश है। महाभारत काल में गांधारी गांधार प्रदेश की राजकुमारी थी जो हस्तिनापुर आई।
 

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gandharva pradesh
बताया कि तब आधुनिक ईरान, इराक, अफगानिस्तान और उत्तरी पाकिस्तान के अलावा कश्मीर और तिब्बत के कुछ प्रदेश गंधर्व प्रदेश के भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में शामिल थे। तब पाकिस्तान भारत का ही एक हिस्सा था। भारतीय वाड़्मय में गंधर्वों को अत्यंत सुंदर, देवताओं की सभा में उपस्थित एंव गीत-संगीत कलाओं में निपुण बताया गया था। आज भी इस इलाके के लोग बहुत सुंदर होते हैं। यह इलाका बहुत अशांत रहा है। लगभग हर साम्राज्यवादी शासक अफगानिस्तान पर आधिपत्य की कोशिश करता रहा है। परंतु यह प्रदेश दुर्दमनीय है और विदेश सत्ताओं के खिलाफ संघर्षरत रहा है। उत्तरी पाकिस्तान गंधर्व प्रदेश का ही हिस्सा रहा है। इसलिए ईरान, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के क्षेत्रों में सालों से भयानक अशांति चल रही है।
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अंतरिक्ष - फोटो : ANI
तिब्बत और कश्मीर भी इसमें शामिल हैं। इन दिनों गुरु और शनि वक्री होने की तैयारी में चल रहे हैं और ऐसा होने पर अगले कुछ महीनों में एतिहासिक घटनाओं को जन्म देंगे। इसी समय सुपर ब्लड वुल्फ मून ने जैसे घटनाक्रम को चिंगारी देने का काम किया है। पंडित शर्मा ने बताया कि 21 जनवरी के पूर्ण चंद्र ग्रहण का असर अगले 6 माह के अंदर-अंदर अभूतपूर्व व एतिहासिक घटनाओं को जन्म देने वाला है।
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