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गांव के लिए किया ऐसा काम कि दुनिया ने किया सलाम

Sun, 06 Mar 2016 10:54 PM IST
चांद मोहम्मद/ अमर उजाला, देहरादून
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आशीष डबराल - फोटो : file photo
उत्तराखंड में पहाड़ से पलायन रोकने को वहां शिक्षा का स्तर सुधारने की हर कोशिश में लगे पौड़ी के छोटे से गांव तिमली के युवा आशीष डबराल के समर्पण को ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी ने भी सलाम किया है।
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आशीष डबराल - फोटो : file photo
29 फरवरी को लंदन में आयोजित कार्यक्रम में उनको कंपनी के विश्व के सभी कर्मचारियों में से उनके सामाजिक कार्यों के आधार पर वालंटियर ऑफ़ द ईयर चुना गया।
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आशीष डबराल - फोटो : file photo
बता दें कि तिमली का यह युवा गुड़गांव स्थित ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर तैनात है और हर वीकेंड पर गांव में 600 किमी का लंबा सफर तय कर बच्चों को पढ़ाने पहुंचता है।

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आशीष डबराल - फोटो : file photo
शिक्षा की दयनीय हालत और उसके कारण बढ़ते पलायन को देख उन्होंने साल 2014 में गांव में तिमली विद्यापीठ स्थापित की थी।
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आशीष डबराल - फोटो : file photo
ब्रिटिश टेलीकॉम चेयरमैन अवार्ड में यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों में कार्यरत कर्मचारियों में से विगत दिसंबर माह में शीर्ष 10 लोगों को उनके सामाजिक कार्यों के आधार पर चुना गया। उसके बाद 29 फरवरी को अवार्ड समारोह में सभी के द्वारा किए गए कार्यों की एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, जिसके आधार पर जजों ने उनको वालंटियर ऑफ़  द ईयर घोषित किया गया।
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आशीष डबराल - फोटो : file photo
सिविल सोसाइटी मिनिस्टर रॉब विल्सन, बीटी ग्रुप के चेयरमैन सर माइकल रेक, बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार क्लेयर बालडिंग ने उन्हें पुरस्कृत किया। पुरस्कार स्वरूप डबराल को करीब एक लाख रुपये मिले हैं। अमर उजाला से बातचीत में डबराल ने बताया कि वह इस धनराशि से विद्यापीठ के लिए एक स्कूली वैन खरीदेंगे, जिससे बच्चों को स्कूल आने-जाने में आसानी होगी।
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गुरुकुल - फोटो : file photo
डबराल ने बताया कि वह जल्द ही कॉलचेस्टर (यूनाइटेड किंगडम) के प्री और प्राइमरी स्कूल में पार्टनरशिप करने जा रहे हैं। यह भागीदारी विद्यापीठ के बच्चों को माडर्न शिक्षा दिलाने और विकास में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया क़ि वह स्कूल में योग ध्यान की कक्षाएं भी चलाएंगे। गांव में तिमली विद्यापीठ की स्थापना से लेकर लंदन में अवार्ड पाने वाले डबराल की इस सफलता के पीछे उनकी पत्नी मेहा, मित्र अशोक घिल्डियाल, शिक्षिका सुमन नेगी और शिक्षक हेमराज असवाल का बड़ा योगदान है। पत्नी हमेशा उनको प्रोत्साहित करती हैं। (स्टोरी : चांद मोहम्मद/ अमर उजाला, देहरादून)
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