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अंकिता हत्याकांड: हाईकोर्ट के बाहर फूट-फूट कर रोने लगे परिजन, बोले- सबूत मिटाए जा रहे हैं, कराएं सीबीआई जांच

Thu, 03 Nov 2022 06:33 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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अंकिता भंडारी - फोटो : अमर उजाला
ऋषिकेश के वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अंकिता के परिजनों ने बेटी की मौत की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सबूत मिटाए जा रहे हैं। वह इस जांच से कतई संतुष्ट नहीं हैं। 

Ankita Murder Case: हाईकोर्ट ने एसआईटी से किया जवाब तलब, कहा- लिखित में दें रिजॉर्ट से क्या सबूत जुटाए

बातचीत के दौरान वे फूट-फूट कर रोने लगे। बोले जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रखेंगे। परिजनों का कहना है कि गरीब परिवार को न्याय के मंदिर से ही उम्मीद है। न्याय के लिए हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की लड़ाई लड़नी पड़ी तो लड़ेंगे। उन्होंने मांग की कि बेटी अंकिता के हत्यारों को फांसी होनी चाहिए।
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अंकिता भंडारी के परिजन - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान उन्होंने सरकार के ऊपर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पौड़ी के जिलाधिकारी व एसएसपी का तबादला क्यों कर दिया गया?। इसके पीछे क्या वजह है। कहा कि वे एसआईटी जांच से संतुष्ट नहीं हैं। मामले की सीबीआइ जांच होनी चाहिए।
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पुलकित आर्य की फैक्टरी में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान उन्होंने सवाल किया कि जब रिजॉर्ट की सुरक्षा के लिए पुलिस और पीएसी के जवान तैनात थे, तो बिजली कनेक्शन कटने के बाद भी अरोपी पुलकित आर्य की फैक्टरी में आग कैसे लग गई व किसने लगाई।

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पुलकित आर्य का रिजॉर्ट - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने आरोप लगाया कि अभियुक्त पुलकित आर्य की फैक्टरी में आग लगाकर सबूत मिटा दिए गए जबकि वहां भी खूंन के छींटे मिले थे। कहा कि आज तक उस वीआईपी का नाम नहीं उजागर हुआ है, जिसकी चर्चा हो रही है। पिता ने एक विधायक पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। कहा कि उन्होंने बुलडोजर चलवाकर साक्ष्य मिटाए हैं। 
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अंकिता भंडारी की मां - फोटो : अमर उजाला
इधर, याचिकाकर्ता आशुतोष नेगी ने कहा कि वह अपने निजी खर्च पर मुकदमा लड़ रहे हैं। चंदे से 49 हजार जमा किए हैं, उसमें से एक पाई भी खर्च नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि याचिका वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है। लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे। यदि सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़े तो जाएंगे। 
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