देहरादून के नया गांव अनारवाला में बृहस्पतिवार रात लगी आग में पांच साल के मासूम समेत एक ही परिवार के पांच सदस्य बुरी तरह जल गए। इनमें एक महिला और दो बच्चों की हालत गंभीर देखते हुए इन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां ले जाते वक्त पांच वर्षीय मासूम ने रास्त में दम तोड़ दिया।
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- फोटो : AmarUjala
कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती एक बेटी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मच्छरों को भगाने के लिए तसले में जलाई गई आग में तारपीन का तेल डालने से भड़की आग की चपेट में आकर ये लोग झुलसे हैं।
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देहरादून कैंट कोतवाली क्षेत्र के नया गांव अनारवाला में बिहार निवासी दामोदर यादव अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ रहता है। यादव ने घर में गाय भी पाल रखी है। कच्चे मकान के बराबर में खाली जमीन पर तिरपाल डालकर उसके नीचे गाय बांधी जाती हैं।
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बृहस्पतिवार रात साढ़े आठ बजे के करीब दामोदर (40) की बेटी आरती (10) मच्छर भगाने के लिए आग जलाने के लिए गई तो उसके साथ अंशिका (7) और आदर्श (5) भी थे। लकड़ी में आग लगाने के लिए आरती ने पास में रखे तारपीन तेल को डाला तो आग की लपटें तिरपाल को छू गई।
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इससे तिरपाल ने आग पकड़ ली और वह बच्चों पर गिर पड़ा। यह देख मां रूबी (35) बच्चों को बचाने के लिए आग में कूद गईं। तभी चीख-पुकार सुनकर दामोदर बच्चों को बचाने लगे तो वह भी झुलस गए। इसी बीच आसपास के लोगों ने बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया।
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झुलसे पूरे परिवार को 108 एंबुलेंस और पड़ोसी राजू भट्ट अपने वाहन से कोरोनेशन अस्पताल लेकर आए। डॉक्टरों ने गंभीर हालत देखते हुए रूबी, आरती और आदर्श को दिल्ली सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। गाजियाबाद पहुंचने पर रास्ते में पांच वर्षीय आदर्श ने दम तोड़ दिया। रूपी और आरती का सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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आज ही खरीदकर लाए थे तिरपाल
इंस्पेक्टर कैंट शंकर सिंह विष्ट ने बताया कि सर्दी की दस्तक के बाद दामोदर यादव बृहस्पतिवार को ही नई तिरपाल खरीदकर लाए थे, ताकि गाय को ठंड से बचाया जा सके। इस कारण तिरपाल सही ढंग से बांधने के बजाए काफी नीचे था।
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इसी वजह से तिरपाल ने जल्दी आग पकड़ ली। वहीं आग बुझाने में शामिल रहे स्थानीय निवासी राजकुमार जायसवाल, संदीप सिंह और उप प्रधान श्याम खत्री ने बताया कि आग के बगल में रखे पेंट ने भी आग भड़काने का काम किया।
रूबी और आदर्श की हालत काफी गंभीर है। दोनों करीब 85 से 90 प्रतिशत तक बर्न है वहीं आरती 70 प्रतिशत बर्न है। तीनों की गंभीर हालत देखते हुए तीनों को रेफर कर दिया गया। सात साल की अंशिका की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है लेकिन उसे भी अंडर ऑब्जर्वेशन रखा गया है।
- डॉ. कुश एरन, बर्न स्पेश्लिस्ट, कोरोनेशन अस्पताल देहरादून