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PICS: हरकी पौड़ी पर सिक्खों ने लगाए हिंदुस्तान मुर्दाबाद के नारे, जमकर हुआ बवाल

Mon, 15 May 2017 06:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी निर्माण की मांग को लेकर सिख समाज के कई लोग हरकी पैड़ी के नाईसोता घाट पहुंचे और अरदास की। विवादित स्थल पर समाज के लोगों के पहुंचने पर पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। इसी दौरान एक व्यक्ति ने हिंदुस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। साथ ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ भी नारेबाजी कर दी। 
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पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्जकर गिरफ्तार किया। जबकि अन्य 24 सिखों को शांतिभंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां से देर शाम छोड़ा दिया गया। हरिद्वार में गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी के निर्माण की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। सिख समाज के लोग प्रेमनगर आश्रम के समीप गंगनहर के किनारे धरने पर बैठे हुए हैं। 
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रविवार को समाज के लोगों ने देशभर के गुरुद्वारों के साथ ही हरकी पैड़ी पर भी अरदास करने की घोषणा की थी। पुलिस को चकमा देकर समाज के करीब 25 लोग हरकी पैड़ी के नाईसोता घाट स्थित विवादित स्थल पर पहुंच गए। वहां पुलिस फोर्स तैनात थी, लेकिन सिखों के जत्थे ने घाट पर अरदास करना शुरू कर दी। आनन-फानन में पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अरदास कर रहे जत्थे को तुरंत हिरासत में लेकर मेला नियंत्रण भवन ले जाने लगे। इसी दौरान एक सिख ने पुलिस वैन के दरवाजे पर खड़े होकर पुलिस की कार्रवाई को अंग्रेजी हुकूमत से भी बुरा करार दिया। 

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उन्होंने कहा कि उनके गुरुद्वारे तोड़े जा रहे हैं, ऐसा अंग्रेजों ने भी नहीं किया था। इसके बाद उसने हिंदुस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ नारेबाजी की। एसआई विपिन कुमार की ओर से देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में जोगा सिंह पुत्र अपार सिंह निवासी गांव इब्राहिमपुर पथरी हरिद्वार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। शांतिभंग में चालान कर अन्य सिखों को शाम तक पुलिस लाइन में बैठाए रखा। 
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बता दें क‌ि गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी को लेकर कई साल से विवाद चल रहा है। इससे पहले भी पंजाब के सिख हरकी पैड़ी कूच के लिए आते रहे हैं, लेकिन उनको रास्ते में ही रोक दिया जाता था। पहली बार हुआ कि सिखों का जत्था विवादित स्थल पहुंचा। यही नहीं वे अरदास करने पर भी गंगा घाट पर बैठ गए थे। इससे साफ पता चलता है कि स्थानीय अभिसूचना तंत्र पूरी तरह से फेल रहा।
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