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भारत के लिए कितना शुभ है विश्व कप का पहला मैच जीतना, तीसरी बार चैंपियन बनेगा इंडिया!

Thu, 06 Jun 2019 08:58 PM IST
Trainee Trainee स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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2011 विश्व कप - फोटो : सोशल मीडिया
भारत ने जीत के साथ विश्व कप 2019 का शुभारंभ किया है। टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने दक्षिण अफ्रीका को अपने पहले ही मुकाबले में पटक कर विश्व कप में अपने आक्रामक तेवर दिखा दिए हैं। हिटमैन रोहित शर्मा ने शतक जड़कर बता दिया कि इंग्लैंड की जमीन पर भी उनका बल्ला किसी भी विपक्षी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ सकता है। विश्व कप की शानदार शुरुआत करने वाली टीम इंडिया ने इससे पहले भी पांच विश्व कप में जीत के साथ अपने सफर का आगाज किया था और टूर्नामेंट की सफल टीमों में से एक रही थी। आइए जानते हैं जीत के साथ वर्ल्ड कप का शुरुआत करने वाली टीम इंडिया टूर्नामेंट में आगे कहां तक पहुंची।


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कपिल देव - फोटो : सोशल मीडिया
1983 विश्व कप का खिताब भारत ने कपिल देव की कप्तानी में दो बार की विश्व विजेता वेस्टइंडीज को हराकर अपने नाम किया था। 1983 विश्व कप की शुरुआत भारत ने वेस्टइंडीज को हराकर की थी।कपिल देव के नेतृत्व वाली टीम इंडिया ने विश्व कप की गत चैंपियन वेस्टइंडीज को चकित कर दिया। सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर और कृष्णमाचारी श्रीकांत विफल रहे थे, लेकिन भारत के यशपाल शर्मा ने 120 गेंदों में 89 रन बनाए, जिसकी बदौलत भारत ने 8 विकेट पर 262 रन बनाए। रोजर बिन्नी ने वेस्टइंडीज के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को आउट किया और पूरी टीम 228 रन पर ऑल आउट हो गई।
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1996 विश्व कप - फोटो : सोशल मीडिया
1996 में भी भारत ने अपना पहला मैच जीता था। इस मैच में केन्या 50 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 199 रनों पर सिमट गई थी। जवाब में सचिन तेंदुलकर की 138 गेंदों की 127 रन की पारी की मदद से लक्ष्य भी हासिल कर लिया था। तेंदुलकर और अजय जडेजा ने 163 रन की साझेदारी की थी।

लेग स्पिनर अनिल कुंबले ने 3 विकेट लिए थे। हालांकि इस विश्व कप में टीम इंडिया का सफर सेमीफाइनल में ही थम गया। कोलकाता में श्रीलंका ने इंडिया को हराकर बाहर कर दिया।

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2003 विश्व कप - फोटो : सोशल मीडिया
2003 के विश्व कप में कप्तान सौरव गांगुली के नेतृत्व में टीम इंडिया का सफर शानदार रहा था। भारत विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा था, जहां उसे ऑस्ट्रेलिया ने हराकर खिताब जीतने के सपने को चकनाचूर कर दिया था। 2003 के वर्ल्ड कप में भारत अपने पहले ही मैच में नीदरलैंड के खिलाफ बड़े अंतर से जीतने में कामयाब रहा। नीदरलैंड के टिम डी लीड ने 4 विकेट चटकाए, जिससे भारत 48.4 ओवरों में 204 रन बनाकर आउट हो गया। जिसमें सचिन तेंदुलकर के अर्धशतक का बड़ा योगदान था। जवागल श्रीनाथ और अनिल कुंबले की बदौलत भारत जीतने में कामयाब रहा, दोनों ने 8 विकेट चटकाए और नीदरलैंड को 136 रन पर ऑलआउट कर दिया।
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2011 विश्व कप - फोटो : सोशल मीडिया
2011 के वर्ल्ड कप ने भारत के उस सपने को पूरा किया, जिसके इंतजार में सारा देश 28 साल से अपनी पलकें बिछाए बैठा था। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत दूसरी बार विश्व चैंपियन बना। इस विश्व कप के पहले ही मैच में भारत ने बांग्लादेश से 2007 की अपनी हार का बदला चुकता किया था। सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने सिर्फ 140 गेंदों पर 175 रन बनाए और युवा विराट कोहली ने भी शतक लगाया। भारत ने बोर्ड पर 370 टांग दिए। उसके बाद बांग्लादेश को मुनाफ पटेल और जहीर खान की धारदार गेंदबाजी ने 283/9 पर रोक दिया। भारत ने अपने विश्व कप अभियान की शुरुआत ही जीत के साथ की थी।
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